अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदेगा भारत, सर्जियो गोर ने किया ऐलान, टेंशन में चीन-पाकिस्तान!

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया है कि भारत जंग में परखे जा चुके जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है.

India to buy Battle Tested Javelin anti-tank systems from the US Sergio Gor
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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया है कि भारत जंग में परखे जा चुके जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की योजना बना रहा है. मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी. गोर ने कहा कि यह भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक अहम कदम है और इससे दोनों देशों के बीच मिलकर हथियार बनाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत युद्ध में इस्तेमाल हो चुके जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग में दिए बयान का भी जिक्र किया.

गोर ने कहा कि यह फैसला अमेरिका और भारत के रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है. इससे दोनों देशों के बीच मिलकर उत्पादन करने के रास्ते भी खुल सकते हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकी

सर्जियो गोर का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान बांग्लादेश को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है. ऐसे समय में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का बढ़ना अहम माना जा रहा है.

कितने जैवलिन सिस्टम खरीदेगा भारत?

जानकारी के मुताबिक, भारत-अमेरिका के बीच होने वाली इस संभावित खरीद में कई तरह के हथियार और उपकरण शामिल हैं. भारत करीब 100 एफजीएम-148 जैवलिन राउंड, एक जैवलिन एफजीएम-148 मिसाइल ‘फ्लाई-टू-बाय’ आधार पर और 25 जैवलिन लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट खरीदने की योजना बना रहा है. इसमें जैवलिन ब्लॉक-1 कमांड लॉन्च यूनिट भी शामिल हो सकती हैं.

क्या है जैवलिन मिसाइल सिस्टम?

एफजीएम-148 जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है. इसे दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को दूर से निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करती है. यानी मिसाइल दागने के बाद सैनिक को लगातार लक्ष्य पर नजर बनाए रखने की जरूरत नहीं होती.

मिसाइल लॉन्च होने के बाद सैनिक तुरंत अपनी जगह बदल सकता है और सुरक्षित स्थान पर जा सकता है. जैवलिन प्रणाली को अमेरिकी रक्षा कंपनियों रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन ने मिलकर विकसित किया है.

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