6th जेन फाइटर जेट प्रोग्राम में भारत की एंट्री, प्रोजेक्ट में बना डायलॉग पार्टनर, चीन को मिलेगी टक्कर?

भारत अब ब्रिटेन, जापान और इटली के साथ चल रहे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से आधिकारिक तौर पर जुड़ गया है. भारत को इस प्रोग्राम में ‘डायलॉग पार्टनर’ का दर्जा दिया गया है.

India enters the 6th-gen fighter jet program Gcap Japan Uk Italy dialogue partner
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: भारत अब ब्रिटेन, जापान और इटली के साथ चल रहे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से आधिकारिक तौर पर जुड़ गया है. भारत को इस प्रोग्राम में ‘डायलॉग पार्टनर’ का दर्जा दिया गया है. भारत ने पिछले महीने कहा था कि वह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम में शामिल होने पर विचार कर रहा है. ब्रिटेन के अधिकारियों के मुताबिक, इस मुद्दे पर भारत और ब्रिटेन के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी. इसके बाद भारत को डायलॉग पार्टनर बनाने का फैसला किया गया.

छठी पीढ़ी के इस लड़ाकू विमान प्रोग्राम को आम तौर पर ‘टेम्पेस्ट’ के नाम से जाना जाता है. पिछले महीने इस प्रोजेक्ट को डिजाइन का काम आगे बढ़ाने के लिए 6.1 अरब डॉलर की फंडिंग मिली थी. इस विमान को 2034 तक सेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.

भारत के लिए डायलॉग पार्टनर बनने का क्या मतलब?

भारत को ‘डायलॉग पार्टनर’ का दर्जा मिलने का मतलब है कि ब्रिटेन, इटली और जापान अब नई दिल्ली के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर बातचीत कर सकेंगे. इसमें विमान के डिजाइन, तकनीक, विकास और उसकी क्षमताओं से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे.

हालांकि, ब्रिटेन के अधिकारियों ने साफ किया है कि डायलॉग पार्टनर बनने का मतलब यह नहीं है कि भारत अभी इस विमान को खरीदने या इसके निर्माण में शामिल हो गया है. भारत को इस प्रोजेक्ट को करीब से समझने और इसकी तकनीक व जरूरतों के बारे में जानकारी हासिल करने का मौका मिलेगा.

भारत के लिए यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तकनीक को समझने का अहम मौका है. देश फिलहाल चौथी पीढ़ी के तेजस लड़ाकू विमान और पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए पर काम कर रहा है. वहीं कई बड़ी सैन्य ताकतें पांचवीं पीढ़ी के विमान इस्तेमाल कर रही हैं और छठी पीढ़ी की तकनीक पर भी आगे बढ़ चुकी हैं.

भारत का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए अभी डिजाइन के चरण में है. इसके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. उस समय तक कुछ देशों के पास छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी सेवा में आ चुके होंगे.

चीन और अमेरिका भी बना रहे छठी पीढ़ी के विमान

चीन पिछले कुछ सालों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उड़ा रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और जापान भी उन देशों में शामिल हैं जिनकी वायुसेना में पांचवीं पीढ़ी के विमान हैं.

अमेरिकी रक्षा विभाग की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, चीन छठी पीढ़ी के दो अलग-अलग लड़ाकू विमान प्रोटोटाइप जे-36 और जे-50 का परीक्षण कर चुका है. किसी विमान को किस पीढ़ी का माना जाएगा, यह उसकी तकनीक और क्षमताओं पर निर्भर करता है. नई पीढ़ी के विमानों में ऐसे सेंसर और तकनीक होती हैं, जो पायलट को दुश्मन का पता लगाने और उस पर फैसला लेने में बढ़त देती हैं.

अमेरिका का लंबे समय से सहयोगी रहा कनाडा भी हाल ही में टेम्पेस्ट प्रोग्राम में पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुआ है. इस प्रोजेक्ट में जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज, ब्रिटेन की बीएई सिस्टम्स और इटली की लियोनार्डो जैसी कंपनियां भी शामिल हैं.

फ्रांस के एफसीएएस प्रोजेक्ट पर भी भारत की नजर

टेम्पेस्ट प्रोग्राम को उस समय और गति मिली, जब जून में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के साथ चल रहे ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सिस्टम’ यानी एफसीएएस प्रोजेक्ट के बंद होने की खबर सामने आई. भारत भी इस प्रोजेक्ट में शामिल होने में दिलचस्पी दिखा चुका है.

इस महीने की शुरुआत में रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने कहा था कि रक्षा मंत्रालय ने भविष्य के छठी पीढ़ी के एफसीएएस प्रोग्राम में फ्रांस के साथ साझेदारी के लिए ठोस प्रयास शुरू कर दिए हैं.

ये भी पढ़ें- PoK पर पाकिस्तान का भारत के 'आर्टिकल 370' जैसा दांव, प्रांत बनाने की कर रहा तैयारी, क्यों बढ़ी बेचैनी?