PM Modi Central Asia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चार दिवसीय मध्य एशिया दौरा कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे, जबकि 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में उनके कई कार्यक्रम होंगे. इस दौरे का सबसे बड़ा पड़ाव शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का शिखर सम्मेलन होगा, जहां उनकी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है.
हालांकि, पीएम मोदी के ताशकंद पहुंचने का महत्व केवल मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं है. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत के कारण भी इस यात्रा पर विशेष नजर रहेगी. 2 अक्टूबर को शास्त्री जी की जयंती से करीब एक महीने पहले पीएम मोदी का ताशकंद दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है.
ताशकंद से शुरू होगी पीएम मोदी की यात्रा
पीएम मोदी की चार दिवसीय मध्य एशिया यात्रा की शुरुआत उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद से होगी. भारत के लिए उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है. दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है. ताशकंद में पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के साथ कई अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.
रक्षा से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक कई मुद्दों पर चर्चा
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच प्रस्तावित बातचीत में क्रिटिकल मिनरल्स, हेल्थकेयर, निवेश, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा, अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र प्रमुख रह सकते हैं. बदलती वैश्विक परिस्थितियों में क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती अहमियत को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा रक्षा सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों पर भी बातचीत हो सकती है. मध्य एशिया की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं.
मध्य एशिया पर क्यों है भारत की नजर?
मध्य एशिया इस समय वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बन चुका है. चीन, रूस, अमेरिका, यूरोपीय देश और तुर्की इस क्षेत्र में अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए उज्बेकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना रणनीतिक रूप से काफी अहम है. मध्य एशिया की भौगोलिक स्थिति इसे भारत के लिए और महत्वपूर्ण बनाती है. यह क्षेत्र अफगानिस्तान, ईरान, रूस, चीन और कैस्पियन क्षेत्र के बीच स्थित है. भारत के लिए जमीन के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंच में पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति एक बड़ी चुनौती रही है. ऐसे में ईरान के चाबहार बंदरगाह के साथ मध्य एशियाई देशों के साथ मजबूत संपर्क भारत की कनेक्टिविटी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है.
ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल भी जा सकते हैं पीएम मोदी
पीएम मोदी के ताशकंद दौरे का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पहलू भी है. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में हुआ था. उस समय उज्बेकिस्तान सोवियत संघ का हिस्सा था. उनकी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर आज भी कई सवाल और चर्चाएं होती हैं. पीएम मोदी के ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो 2 अक्टूबर को शास्त्री जयंती से ठीक पहले यह यात्रा उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी. पीएम मोदी के महात्मा गांधी मेमोरियल जाने का कार्यक्रम भी बताया गया है.
बिश्केक में SCO Summit पर रहेगी दुनिया की नजर
उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे. यहां वह SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. भारत 2017 से इस संगठन का पूर्ण सदस्य है और इससे पहले 2005 से पर्यवेक्षक के रूप में जुड़ा हुआ था. SCO समिट में भारत सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं के तौर पर सामने रख सकता है. सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी सदस्य देशों के नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं.
पुतिन से होगी अहम द्विपक्षीय बातचीत
बिश्केक में पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच प्रस्तावित मुलाकात इस दौरे के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक कार्यक्रमों में से एक होगी. भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहे हैं. ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है. इस मुलाकात से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा भी हो चुकी है, जहां उन्होंने रूसी नेतृत्व के साथ भारत-रूस सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत की थी.
BRICS से पहले SCO में भारत की बड़ी मौजूदगी
बिश्केक में होने वाला SCO Summit ऐसे समय हो रहा है, जब सितंबर में भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है. ऐसे में पीएम मोदी का मध्य एशिया दौरा भारत की सक्रिय विदेश नीति और क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. ताशकंद से बिश्केक तक पीएम मोदी का यह दौरा भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों मोर्चों पर अहम है. उज्बेकिस्तान के साथ रिश्तों को नई गति देने से लेकर रूस के साथ बातचीत और SCO में भारत की प्राथमिकताएं रखने तक, इस यात्रा पर वैश्विक स्तर पर भी नजर रहेगी.
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