नई दिल्ली: पाकिस्तान से जुड़े एक जासूसी नेटवर्क के आरोप में दिल्ली पुलिस ने एक दंपति को गिरफ्तार किया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क का पता लगाने का दावा किया है. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद साहिल और उसकी पत्नी समीरा के तौर पर हुई है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों 2024 से सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के संपर्क में थे. आरोप है कि 2024 और 2025 के बीच इस दंपति ने दुबई के रास्ते पाकिस्तान को आठ भारतीय सिम कार्ड भेजे. इसके बदले उन्हें करीब 30 हजार रुपये मिले.
दिल्ली में ऐसे पकड़ा गया कपल
पुलिस के मुताबिक, इन सिम कार्ड से चलने वाले फोन नंबरों का इस्तेमाल मैसेजिंग अकाउंट बनाने और संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए किया जाता था. इन नंबरों के जरिए भारतीय लोगों और समूहों तक पहुंच बनाने की भी कोशिश की गई.
स्पेशल सेल का आरोप है कि आईएसआई समर्थित नेटवर्क ने इस दंपति का इस्तेमाल भारतीय सिम कार्ड हासिल करने, नए लोगों को नेटवर्क से जोड़ने और संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए किया. जांच में दोनों के पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क होने की बात भी सामने आई है.
दिल्ली से कराची और इस्लामाबाद तक कनेक्शन
अधिकारियों के अनुसार, जांच में दिल्ली से लेकर कराची और इस्लामाबाद तक इस नेटवर्क के कनेक्शन का पता चला है. पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर कथित तौर पर इस दंपति को पैसे भेजते थे.
जांच में यह भी पता चला कि भेजे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल पाकिस्तान में व्हाट्सऐप खाते बनाने के लिए किया गया. कुछ खातों के जरिए भारतीय व्हाट्सऐप समूहों में शामिल होने की कोशिश की गई, ताकि वहां से जानकारी हासिल की जा सके.
सैन्य इलाकों की रेकी का भी आरोप
पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर सोशल मीडिया और सुरक्षित बातचीत वाले माध्यमों के जरिए भारत में मौजूद लोगों से संपर्क कर रहे थे. इनमें कथित तौर पर ओवरग्राउंड वर्कर और स्लीपर सेल से जुड़े लोग भी शामिल थे.
पुलिस का आरोप है कि साहिल को भारत के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य छावनी वाले इलाकों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसके अलावा उस पर जासूसी और दूसरे कामों के लिए लोगों को नेटवर्क में शामिल करने का भी आरोप है.
सेना से जुड़ी जानकारी भेजने का आरोप
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि साहिल ने कथित तौर पर उन भारतीय सैनिकों से जुड़ी जानकारी साझा की थी, जो ट्रिब्यूनल के सामने कोर्ट-मार्शल की कार्रवाई का सामना कर रहे थे.
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क सिर्फ सामान्य जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं था. इसके जरिए भारतीय रक्षा ठिकानों और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की भी कोशिश की जा रही थी.