भारत की 'तीसरी आंख' बनेगा Gisat-1A सैटेलाइट, PSLV-C62 की असफलता के बाद ISRO का बड़ा मिशन, जानें खासियत

12 जनवरी को पीएसएलवी-सी62 मिशन के असफल होने के बाद इसरो एक बार फिर लॉन्च की तैयारी में जुट गया है. सरकार ने रणनीतिक रूप से अहम जीसैट-1ए (ईओएस-05) और एनवीएस-03 उपग्रहों की लॉन्चिंग को मंजूरी दे दी है.

The government permission to ISRO to launch Gisat-1A and NavIC India Third Eye
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

ISRO: 12 जनवरी को पीएसएलवी-सी62 मिशन के असफल होने के बाद इसरो एक बार फिर लॉन्च की तैयारी में जुट गया है. सरकार ने रणनीतिक रूप से अहम जीसैट-1ए (ईओएस-05) और एनवीएस-03 उपग्रहों की लॉन्चिंग को मंजूरी दे दी है. जानकारी के मुताबिक, इसरो 4 सितंबर की सुबह जीसैट-1ए को अंतरिक्ष में भेज सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, इसरो 3 सितंबर की सुबह भी जीसैट-1ए की लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा था. जीसैट-1ए को पुराने जीसैट-1 मिशन की तरह ही इस तरह तैयार किया गया है कि यह बड़े और महत्वपूर्ण इलाकों की बार-बार लगभग रियल टाइम तस्वीरें ले सके. इससे किसी क्षेत्र पर लगातार नजर रखना आसान होगा.

सैटेलाइट देगा लगभग रियल टाइम तस्वीरें

करीब 2.2 टन वजन वाला जीसैट-1ए देश की पृथ्वी निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा. यह बड़े इलाकों की लगातार और लगभग रियल टाइम तस्वीरें उपलब्ध करा सकता है. इससे खेती, खनिज, आपदा प्रबंधन, बादल, बर्फ, ग्लेशियर और समुद्र से जुड़े अध्ययन में मदद मिलेगी.

हालांकि इसका मुख्य इस्तेमाल नागरिक कामों के लिए होगा, लेकिन इसकी लगातार निगरानी करने की क्षमता सुरक्षा और सैन्य अभियानों की योजना में भी काम आ सकती है. इसरो के एक वैज्ञानिक के मुताबिक, जीसैट-1ए सिर्फ पुराने जीसैट-1 की जगह लेने वाला उपग्रह नहीं है, बल्कि इसमें कई अहम सुधार किए गए हैं.

देश के नेविगेशन सिस्टम को मिलेगी मजबूती

दूसरी ओर, एनवीएस-03 भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम नाविक को और मजबूत करेगा. यह भारत के जीपीएस विकल्प को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

दोनों उपग्रह कई हफ्तों से श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च की मंजूरी का इंतजार कर रहे थे.

कई बार टल चुका है जीसैट मिशन

जीसैट कार्यक्रम को पहले भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. जीसैट-1 को पहली बार 5 मार्च 2020 को लॉन्च किया जाना था, लेकिन लॉन्च से ठीक पहले मिशन रोक दिया गया. इसके बाद 2021 की शुरुआत में इसे भेजने की तैयारी हुई, लेकिन वोल्टेज से जुड़ी समस्या के कारण लॉन्च टालना पड़ा.

आखिरकार 12 अगस्त 2021 को जीएसएलवी-एफ10 के जरिए जीसैट-1 को लॉन्च किया गया. रॉकेट के पहले और दूसरे चरण ने सही काम किया, लेकिन क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में तकनीकी खराबी के कारण इंजन शुरू नहीं हो सका और मिशन असफल हो गया.

इसके बाद जीएसएलवी ने लगातार चार सफल मिशन पूरे किए. इसकी पिछली उड़ान 30 जुलाई 2025 को निसार मिशन थी, जिसे नासा और इसरो की साझेदारी के तहत जीएसएलवी-एफ16 से लॉन्च किया गया था.