Javelin Anti-Tank Missile: भारत अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. अगर यह सौदा होता है तो भारतीय सेना की दुश्मन के टैंकों और दूसरे बख्तरबंद वाहनों से निपटने की क्षमता और मजबूत हो सकती है.
जैवलिन को एक आधुनिक और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाले एंटी-टैंक हथियार के तौर पर जाना जाता है. भारत ऐसे समय में इसे खरीदने पर विचार कर रहा है, जब वह अमेरिका के साथ अपने रक्षा संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है.
क्या है जैवलिन मिसाइल सिस्टम?
जैवलिन एक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है. यानी इसे सैनिक अपने साथ ले जा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कंधे से लॉन्च कर सकते हैं. इसे अमेरिकी कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और RTX ने विकसित किया है.
इस सिस्टम की खास बात यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए किसी बड़े वाहन या भारी प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं होती. पैदल सैनिक भी इसका इस्तेमाल कर दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बना सकते हैं.
‘दागो और भूल जाओ’ इसकी सबसे बड़ी खासियत
जैवलिन की सबसे चर्चित खूबियों में इसकी ‘फायर एंड फॉरगेट’ यानी ‘दागो और भूल जाओ’ क्षमता शामिल है. इसका मतलब है कि लक्ष्य को लॉक करने के बाद मिसाइल को लगातार सैनिक को दिशा देने की जरूरत नहीं पड़ती. मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है. इससे मिसाइल दागने के बाद सैनिक तुरंत अपनी जगह बदल सकता है और खुद को सुरक्षित कर सकता है.
जैवलिन में टॉप-अटैक मोड भी है. इसमें मिसाइल टैंक के ऊपर से हमला कर सकती है. टैंक का ऊपरी हिस्सा आमतौर पर उसके सामने या दूसरे हिस्सों की तुलना में कमजोर माना जाता है. जरूरत के हिसाब से मिसाइल को डायरेक्ट-अटैक मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
रात और खराब मौसम में भी काम करने के लिए डिजाइन
जैवलिन में इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से सिस्टम लक्ष्य को पहचानने और उस पर निशाना साधने में सक्षम होता है. इसे युद्ध के मैदान की अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है. यही वजह है कि यह पैदल सैनिकों के लिए टैंक और दूसरे बख्तरबंद खतरों के खिलाफ एक उपयोगी हथियार माना जाता है.
युद्ध में हो चुका है इस्तेमाल
जैवलिन का इस्तेमाल कई युद्ध क्षेत्रों में किया जा चुका है. खास तौर पर यूक्रेन युद्ध के दौरान इसके इस्तेमाल ने इस मिसाइल को काफी चर्चा में ला दिया. वहां इसके इस्तेमाल से यह भी सामने आया कि छोटे और आसानी से ले जाए जा सकने वाले एंटी-टैंक हथियार आधुनिक युद्ध में कितने अहम हो सकते हैं. भारत के पास पहले से ही कई एंटी-टैंक हथियार मौजूद हैं. ऐसे में जैवलिन की खरीद से सेना को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए एक और विकल्प मिल सकता है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
भारत की सीमाएं काफी लंबी हैं और कई इलाकों में सैनिकों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात रहना पड़ता है. ऐसे में हल्के और मोबाइल एंटी-टैंक हथियार पैदल सैनिकों के लिए काफी उपयोगी हो सकते हैं.
जैवलिन को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. इसलिए जरूरत पड़ने पर सैनिक इसे तेजी से इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, अभी तक भारत और अमेरिका की ओर से इस संभावित सौदे की कीमत या कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
भारत-अमेरिका रक्षा रिश्तों के लिए भी अहम
जैवलिन की संभावित खरीद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का एक और उदाहरण हो सकती है. दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में सैन्य और रणनीतिक सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं. भारत के लिए जैवलिन सिर्फ एक नया हथियार नहीं है.
इससे सेना की एंटी-टैंक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ अमेरिका के साथ रक्षा तकनीक और सैन्य सहयोग को भी आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है. अगर यह खरीद आगे बढ़ती है तो भारतीय सैनिकों को दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ एक और आधुनिक विकल्प मिल जाएगा.
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