Israel Somaliland Relations: इजराइल के एक हालिया फैसले को लेकर सऊदी अरब समेत कई अरब और मुस्लिम देशों ने कड़ी नाराजगी जताई है. इन देशों ने साफ कहा है कि यह फैसला गलत है और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है.
इजराइल के फैसले पर संयुक्त विरोध
सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और कुवैत सहित कुल 16 देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साथ बयान जारी किया. इस बयान में सभी देशों ने इजराइल के उस कदम की आलोचना की, जिसमें उसने सोमालीलैंड के लिए राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने का फैसला लिया है.
इन देशों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है. साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ के नियमों का भी उल्लंघन करता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के फैसले किसी देश की संप्रभुता और एकता को कमजोर करते हैं, जो स्वीकार नहीं किए जा सकते.
सोमालिया की संप्रभुता का मुद्दा
इन देशों ने साफ तौर पर कहा कि इजराइल का यह कदम सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है. उनका मानना है कि किसी भी देश के अंदरूनी मामलों में इस तरह दखल देना गलत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे फैसले जारी रहे, तो इससे पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता पर असर पड़ सकता है, खासकर अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में.
क्यों बढ़ा विवाद
दरअसल, इजराइल ने हाल ही में सोमालीलैंड को एक अलग देश के रूप में मान्यता देने और वहां अपना प्रतिनिधि भेजने की घोषणा की थी. इसी के बाद यह विवाद शुरू हुआ.
सोमालिया ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. उसका कहना है कि सोमालीलैंड उसका ही हिस्सा है और उसे अलग देश मानना उसकी संप्रभुता के खिलाफ है. यही वजह है कि कई अन्य देश भी सोमालिया के समर्थन में सामने आए हैं.
सोमालीलैंड क्या है
सोमालीलैंड ने 1991 में खुद को सोमालिया से अलग घोषित किया था. यह उस समय हुआ जब सोमालिया में केंद्रीय सरकार गिर गई थी और देश में लंबे समय तक गृहयुद्ध चला था.
तब से सोमालीलैंड अपने आप को अलग तरीके से चला रहा है. यहां अपनी सरकार, संसद, पुलिस, मुद्रा और पासपोर्ट सिस्टम है. हालांकि, कई सालों तक इसे दुनिया के ज्यादातर देशों ने अलग देश के रूप में मान्यता नहीं दी थी.
सोमालीलैंड की आबादी करीब 60 लाख है. यह सोमालिया के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और इसकी सीमाएं जिबूती और इथियोपिया से लगती हैं. यहां अपनी मुद्रा चलती है, टैक्स वसूला जाता है और व्यापार को भी खुद ही नियंत्रित किया जाता है.
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है. अगर अलग-अलग देश इस तरह के फैसले लेते हैं, तो इससे क्षेत्र में नए विवाद पैदा हो सकते हैं. फिलहाल, कई देशों ने इजराइल से अपने फैसले पर फिर से सोचने की अपील की है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे.
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