घुटनों पर नक्सल आंदोलन, पहली बार हिंसा को लेकर मांगी माफी; कहा- हथियार उठाना सबसे बड़ी भूल

Naxal Latest letter: छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी इलाकों में बीते चार दशकों से चले आ रहे माओवादी संघर्ष ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल मल्लोजुला वेणुगोपाल, जो अभय और भूपति के नाम से भी जाने जाते हैं, ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.

Naxal movement on its knees apologizes for violence for the first time
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Naxal Latest letter: छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी इलाकों में बीते चार दशकों से चले आ रहे माओवादी संघर्ष ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल मल्लोजुला वेणुगोपाल, जो अभय और भूपति के नाम से भी जाने जाते हैं, ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. अपने आधिकारिक पत्र में उन्होंने न केवल माओवादी आंदोलन में की गई हिंसा को "सबसे बड़ी भूल" बताया, बल्कि जनता से खुलकर माफी भी मांगी है.

अभय की ओर से जारी इस पत्र में यह साफ-साफ लिखा गया है कि चार दशकों तक चले सशस्त्र संघर्ष ने जिन उद्देश्यों को लेकर शुरुआत की थी, वे पूरे नहीं हुए. इसके बजाय आदिवासी समुदायों को विकास और शांति से दूर कर दिया गया. महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों की जानें गईं, और कथित क्रांति ने समाज में केवल भय और विनाश बोया.

अब लोकतंत्र की राह अपनाने की अपील

पत्र में अभय ने न सिर्फ अपनी गलती स्वीकार की है, बल्कि बाकी माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसक विचारधारा को त्यागें और लोकतांत्रिक ढांचे के तहत अपने भविष्य की तलाश करें. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हथियार उठाना एक भारी भूल थी और यह जनता के साथ विश्वासघात जैसा था.

आत्मसमर्पण की ओर परिवार का रुझान

भूपति का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब उनके परिवार के अन्य सदस्य पहले ही मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं. उनकी पत्नी तारक्का ने पिछले साल आत्मसमर्पण किया था, वहीं हाल ही में उनकी भाभी सुजाता, जो एक करोड़ की इनामी थी, ने भी हथियार छोड़ दिए हैं.

सुरक्षा एजेंसियों का रुख और हालिया मुठभेड़ें

इस घटनाक्रम को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन की अंदरूनी कमजोरी और विघटन के संकेत के रूप में देख रही हैं. हालांकि, हिंसा अभी पूरी तरह थमी नहीं है. हाल ही में सुकमा में एक मुठभेड़ में पांच लाख की इनामी महिला माओवादी बुस्की नुप्पो मारी गई. बीजापुर जिले में भी दो इनामी माओवादी मारे गए हैं, जो शिक्षकों की हत्या में शामिल थे. कांकेर में वांछित माओवादियों की पहचान के लिए पोस्टर भी लगाए गए हैं.

पहले हिंसा रोको, फिर वार्ता संभव

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि माओवादी वाकई हथियार छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें हत्याएं बंद करनी होंगी और जंगलों में बिछाई गई आईईडी हटानी होगी. पत्र की प्रामाणिकता की जांच के बाद ही सरकार उचित निर्णय लेगी.

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