पीएम मोदी की अपील का दिखने लगा असर, वर्क फ्रॉम होम लागू करने की तैयारी में ये दिग्‍गज टेक कंपनी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और रिमोट वर्किंग को बढ़ावा देने की अपील का असर अब कॉर्पोरेट सेक्टर में दिखाई देने लगा है.

Zoho preparing to implement work from home on PM Modis appeal
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Work From Home: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और रिमोट वर्किंग को बढ़ावा देने की अपील का असर अब कॉर्पोरेट सेक्टर में दिखाई देने लगा है. देश की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल जोहो (Zoho) ने संकेत दिए हैं कि वह एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम नीति पर विचार कर सकती है.

जोहो के सीईओ श्रीधर वेंबु ने कहा है कि कंपनी प्रधानमंत्री की सलाह को गंभीरता से ले रही है और ईंधन की खपत कम करने के लिए नए विकल्पों पर काम कर रही है. उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी फिर से कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है.

पीएम मोदी ने की थी ईंधन बचाने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए वैश्विक हालात और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है और ऐसे समय में देश को ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए.

प्रधानमंत्री ने लोगों और कंपनियों से अपील की थी कि जहां संभव हो, वहां वर्क फ्रॉम होम को अपनाया जाए ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सके. उन्होंने निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो के उपयोग को भी बढ़ावा देने की बात कही थी.

जोहो ने शुरू किया मंथन

प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद जोहो के सीईओ श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी लोग प्रधानमंत्री की सलाह को गंभीरता से लेंगे.

वेंबु ने कहा कि उनकी कंपनी पिछले कुछ महीनों से पूरी तरह वर्क फ्रॉम ऑफिस मॉडल पर काम कर रही थी, लेकिन अब परिस्थितियों को देखते हुए फिर से वर्क फ्रॉम होम नीति पर विचार किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी डीजल के इस्तेमाल को कम करने और प्राकृतिक खेती जैसे टिकाऊ विकल्पों पर भी ध्यान दे रही है.

छोटे कारोबारियों को लेकर भी चिंता

वर्क फ्रॉम होम मॉडल लागू होने पर अक्सर यह सवाल उठता है कि ऑफिस के आसपास छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों की आजीविका पर इसका क्या असर पड़ेगा.

ऑफिस कैंटीन, चाय की दुकानों, स्नैक्स स्टॉल और अन्य छोटे विक्रेताओं का कारोबार कर्मचारियों की आवाजाही पर निर्भर करता है. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने जब इस मुद्दे पर सवाल उठाया, तो श्रीधर वेंबु ने कहा कि जोहो अपने कर्मचारियों और सपोर्ट स्टाफ का पूरा ध्यान रखती है.

उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान भी कंपनी ने अपने कैंटीन स्टाफ और ड्राइवरों का साथ नहीं छोड़ा था. उस समय कंपनी की रसोई का उपयोग आसपास के जरूरतमंद लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए किया गया था.

वेंबु ने संकेत दिए कि अगर दोबारा वर्क फ्रॉम होम लागू होता है, तो कंपनी इस तरह की सामाजिक जिम्मेदारियों को फिर निभा सकती है.

कई शहरों में हैं जोहो के ऑफिस

जोहो के कार्यालय देश के कई बड़े शहरों में मौजूद हैं. चेन्नई, तेनकासी, नोएडा, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में कंपनी के हजारों कर्मचारी काम करते हैं.

अगर इतनी बड़ी टेक कंपनी दोबारा वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाती है, तो इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य कंपनियां भी ऊर्जा बचत और लागत कम करने के उद्देश्य से इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं.

बदल सकती है कार्य संस्कृति

वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं. भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए ईंधन बचत एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है.

ऐसे में वर्क फ्रॉम होम मॉडल को केवल सुविधा नहीं बल्कि ऊर्जा संरक्षण के उपाय के रूप में भी देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां हाइब्रिड या रिमोट वर्किंग मॉडल को फिर से प्राथमिकता दे सकती हैं.

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