बिहार-झारखंड में मॉनसून की एंट्री; दिल्ली-यूपी, हरियाणा तक कब आएगा? पढ़ें IMD का लेटेस्ट अपडेट

Monsoon Update: जून का महीना आधा गुजर चुका है, लेकिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों को अब भी भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है. कुछ दिनों पहले हुई हल्की बारिश ने राहत की उम्मीद जगाई थी, लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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Monsoon Update: जून का महीना आधा गुजर चुका है, लेकिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों को अब भी भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है. कुछ दिनों पहले हुई हल्की बारिश ने राहत की उम्मीद जगाई थी, लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे में हर किसी की नजर मॉनसून की अगली चाल पर टिकी हुई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) का ताजा अपडेट राहत भरी खबर लेकर आया है. विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मॉनसून दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तक पहुंच सकता है, जिससे गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने की संभावना है.

देश के कई हिस्सों में पहुंच चुका है मॉनसून

मौसम विभाग के वैज्ञानिक नरेश कुमार के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून देश के कई राज्यों में सक्रिय हो चुका है. कर्नाटक के अधिकांश हिस्सों, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों और पूरे पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून पहुंच चुका है. इसके अलावा बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी भारत के अन्य क्षेत्रों में भी मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना जताई गई है. हालांकि मॉनसून की प्रगति जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार पहले की तुलना में धीमी पड़ती दिखाई दे रही है, जिससे कई राज्यों में बारिश की स्थिति उम्मीद के अनुरूप नहीं बन पा रही है.

दिल्ली-एनसीआर को कब मिलेगी राहत?

दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लोगों के लिए मौसम विभाग ने राहत भरी संभावना जताई है. विभाग का अनुमान है कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है. इसके साथ ही मॉनसून की आधिकारिक एंट्री भी हो सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के दिनों में हुई बारिश के कारण तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है. आने वाले दिनों में तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल दिल्ली, पंजाब और राजस्थान में लू चलने की संभावना नहीं है. हालांकि उत्तर प्रदेश के दक्षिणी इलाकों और मध्य प्रदेश से सटे क्षेत्रों में गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर सकती हैं.

मॉनसून की रफ्तार क्यों पड़ रही है धीमी?

मौसम विभाग के ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून फिलहाल कुछ क्षेत्रों में कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य और पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में बादलों की कमी देखी गई है. यह स्थिति कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय मानी जा रही है. 17 जून को प्राप्त INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के कई हिस्सों में बादलों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉनसून गतिविधियों के धीमे पड़ने का संकेत हो सकता है.

बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता

देशभर में बारिश के आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार 4 जून से 17 जून के बीच सामान्य रूप से जहां 65.9 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं इस अवधि में केवल 39.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसका मतलब है कि देश में अब तक लगभग 40 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है. यह कमी केवल एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई प्रमुख राज्यों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. महाराष्ट्र में 79 प्रतिशत, गुजरात में 98 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 65 प्रतिशत और मेघालय में 85 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा बिहार, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों में भी सामान्य से कम बारिश हुई है.

मॉनसून सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि देश की कृषि अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा भी है. बारिश की कमी का सीधा असर खेती, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर पड़ता है. यही वजह है कि किसान से लेकर आम नागरिक तक सभी की निगाहें मॉनसून की अगली चाल पर टिकी हुई हैं.

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