मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, देश में 35% कम बारिश की संभावना, किसानों की बढ़ी चिंता

Monsoon Rain: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है. जून के शुरुआती दिनों में अच्छी प्रगति दिखाने वाला मानसून अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है, जिसका असर खेती-किसानी पर पड़ने लगा है.

Monsoon momentum slows 35% rainfall deficit likely across the country raising farmers concerns
Image Source: ANI/ File

Monsoon Rain: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है. जून के शुरुआती दिनों में अच्छी प्रगति दिखाने वाला मानसून अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है, जिसका असर खेती-किसानी पर पड़ने लगा है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 16 जून 2026 के बीच देश में औसत से लगभग 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. इस अवधि में सामान्य रूप से 68.1 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार केवल 44 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है.

मध्य भारत में सबसे अधिक बारिश की कमी

बारिश की सबसे बड़ी कमी मध्य भारत में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 61 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 43 प्रतिशत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में 14 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. उत्तर-पश्चिम भारत ऐसा एकमात्र क्षेत्र रहा, जहां सामान्य से 5 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई.

किसानों की बढ़ी चिंता

मानसून की धीमी रफ्तार खरीफ सीजन के लिए चिंता का विषय बन रही है. धान, मक्का और दालों जैसी कई प्रमुख फसलें बारिश पर निर्भर हैं. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इसका असर जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर पर भी पड़ने की आशंका है.

मुंबई समेत कई क्षेत्रों में मानसून की रफ्तार धीमी

इस वर्ष मानसून ने केरल में सामान्य तिथि से तीन दिन देरी से प्रवेश किया था. इसके बाद महाराष्ट्र और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में इसकी प्रगति धीमी हो गई. मुंबई में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि 11 जून मानी जाती है, लेकिन निर्धारित समय के कई दिन बाद भी मानसून वहां पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया.

अगले कुछ दिनों में बढ़ सकता है मानसून

IMD के अनुसार, अगले 4 से 5 दिनों के दौरान तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं. मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वर्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है.

कृषि मंत्रालय ने की तैयारियों की समीक्षा

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में कम बारिश या असमान वर्षा की संभावना है, वहां पहले से वैकल्पिक योजनाएं तैयार की जाएं.

उन्होंने राज्यों के साथ मिलकर फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने, जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, इंटरक्रॉपिंग और वैकल्पिक फसल प्रणाली पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को मौसम संबंधी चुनौतियों से राहत मिल सके.

अल नीनो को लेकर भी बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भी चेतावनी दी है कि नया अल नीनो चरण भारत के ग्रीष्मकालीन मानसून को प्रभावित कर सकता है. संगठन के अनुसार, इससे चावल और मक्का जैसी वर्षा आधारित फसलों पर दबाव बढ़ सकता है.

FAO का मानना है कि अल नीनो का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक कृषि बाजारों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले सप्ताह मानसून और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

ये भी पढ़ें- राजौरी में धरती फटी, 3 मकान जमींदोज; कलाबन-कोटली में दहशत का माहौल, कई घर कराए गए खाली