राजौरी में धरती फटी, 3 मकान जमींदोज; कलाबन-कोटली में दहशत का माहौल, कई घर कराए गए खाली

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का मंजाकोट क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा है. कलाबन-कोटली गांव में लगातार जमीन धंसने की घटनाओं ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है.

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जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का मंजाकोट क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा है. कलाबन-कोटली गांव में लगातार जमीन धंसने की घटनाओं ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है. पिछले कई दिनों से धरती में उभर रही दरारें अब बड़े खतरे का रूप ले चुकी हैं. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है. गांव के लोगों में भविष्य को लेकर भय और अनिश्चितता का माहौल है, जबकि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.

एक सप्ताह से जारी है भूमि धंसाव

ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन धंसने की प्रक्रिया करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुई थी. शुरुआत में खेतों और सड़कों पर मामूली दरारें दिखाई दी थीं, जिन्हें सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज कर दिया गया. लेकिन समय के साथ ये दरारें चौड़ी होती चली गईं और अब कई स्थानों पर जमीन स्पष्ट रूप से धंसती नजर आ रही है. गांव को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सड़क मार्ग भी कई हिस्सों में क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

मकानों और कृषि भूमि को भारी नुकसान

भूमि धंसाव का सबसे बड़ा असर गांव के आवासीय क्षेत्रों और खेती की जमीन पर पड़ा है. प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार तीन मकान पूरी तरह से ढह चुके हैं. इसके अलावा कई अन्य घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे उन्हें रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है. प्रभावित परिवारों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है.

केवल मकान ही नहीं, बल्कि कृषि भूमि को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है. खेतों में कई जगह गहरी दरारें पड़ गई हैं, जिससे खेती योग्य भूमि प्रभावित हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों कनाल उपजाऊ जमीन इस आपदा की चपेट में आ चुकी है, जिससे आने वाले समय में उनकी आजीविका पर भी असर पड़ सकता है.

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर उठे सवाल

गांव के कई लोगों ने इस समस्या के पीछे क्षेत्र में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि भारी मशीनों के लगातार उपयोग और बड़े पैमाने पर की गई खुदाई के कारण मिट्टी की प्राकृतिक संरचना कमजोर हो गई है. ग्रामीणों का मानना है कि इसी वजह से जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ी हैं. हालांकि प्रशासन ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही भूमि धंसाव के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा. फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

प्रशासन ने किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजौरी के उपायुक्त अभिषेक शर्मा राजस्व विभाग की टीम के साथ प्रभावित गांव पहुंचे. अधिकारियों ने मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया और प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं. प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी. इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके. प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

मानसून से पहले बढ़ी लोगों की बेचैनी

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता आने वाला मानसून है. उनका कहना है कि यदि बारिश शुरू होने से पहले कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो हालात और ज्यादा भयावह हो सकते हैं. भारी वर्षा के कारण जमीन धंसने की प्रक्रिया तेज होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे और मकान तथा कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है.

इसी वजह से प्रभावित परिवार सरकार से तत्काल राहत, उचित मुआवजा और सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं. साथ ही वे चाहते हैं कि विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

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