भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने जा रही है. जून के तीसरे सप्ताह में कोलकाता में आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में तीन नए युद्धपोतों को नौसेना में शामिल किए जाने की तैयारी है. इन जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
इन युद्धपोतों का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है. समारोह में केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है.
नौसेना में शामिल होंगे ये तीन युद्धपोत
कमीशनिंग कार्यक्रम के तहत जिन जहाजों को नौसेना में शामिल किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:
इन तीनों प्लेटफॉर्म की भूमिका अलग-अलग है और इन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है.
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की पकड़
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच भारत लगातार अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है. नए युद्धपोतों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.
भारतीय नौसेना वर्तमान में कई नए जहाजों और रक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है, ताकि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके.
INS दूनागिरी की विशेषताएं
INS दूनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित किया गया पांचवां स्टेल्थ फ्रिगेट है और इस श्रेणी का दूसरा जहाज है जिसका निर्माण GRSE में किया गया है.
इस युद्धपोत की प्रमुख क्षमताएं:
इस जहाज का निर्माण लगभग 80 महीनों में पूरा किया गया, जो इसी श्रेणी के पहले युद्धपोत INS नीलगिरी की तुलना में कम समय है.
प्रोजेक्ट 17A के तहत INS महेंद्रगिरि और INS विंध्यगिरि को भी भविष्य में नौसेना में शामिल किया जाना है.
पनडुब्बी रोधी क्षमता बढ़ाएगा INS अग्रय
INS अग्रय अरनाला-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्यक्रम का हिस्सा है. यह कार्यक्रम कुल 16 जहाजों के निर्माण के लिए शुरू किया गया था.
इस युद्धपोत की खासियतें:
यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है.
समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की निगरानी, समुद्री सुरक्षा और युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत होगी.
चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को देखते हुए इन आधुनिक युद्धपोतों की तैनाती भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.
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