जंग के मैदान में अमेरिकी एंयर डिफेंस सिस्टम THAAD की निकली हवा! जानें इस हथियार पर क्यों उठे सवाल

THAAD Missile System: अमेरिका का हाईटेक मिसाइल रक्षा सिस्टम THAAD दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में माना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट करके नष्ट करना है. 

middile east conflict American air defense system THAAD detonated in the battlefield
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THAAD Missile System: अमेरिका का हाईटेक मिसाइल रक्षा सिस्टम THAAD दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में माना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट करके नष्ट करना है. 

लेकिन हाल के हमलों में इस सिस्टम से जुड़े अहम रडार को नुकसान पहुंचने के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

मिडिल ईस्ट में THAAD की तैनाती

अमेरिका ने मध्य पूर्व में THAAD के लगभग पांच सिस्टम तैनात कर रखे हैं. इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी दो सिस्टम मौजूद हैं, जहां चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए इनकी रणनीतिक अहमियत बढ़ जाती है.

हालांकि ये सिस्टम बेहद उन्नत और महंगे होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते. ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे छोटे हमलावर ड्रोन भी इनमें नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सिस्टम लंबे समय तक निष्क्रिय हो सकता है.

अमेरिकी एयर डिफेंस रडार को बनाया गया निशाना

ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों के शुरुआती दौर में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी एयर डिफेंस से जुड़े रडार सिस्टम को निशाना बनाया. ये रडार आने वाली मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को पहचानने और ट्रैक करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार AN/TPY-2 radar सिस्टम जॉर्डन में नष्ट हो गया, जबकि AN/FPS-132 रडार कतर में क्षतिग्रस्त हुआ. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में भी कुछ रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे किसी एक रडार सिस्टम को बदलने में करीब 50 करोड़ डॉलर यानी लगभग 4200 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है. इसके अलावा इन्हें दोबारा स्थापित करने में भी काफी समय लगता है, जिससे क्षेत्र की निगरानी क्षमता कमजोर हो जाती है.

ड्रोन हमलों का बढ़ता खतरा

आधुनिक युद्ध में ड्रोन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन कई बार रडार से बचकर सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. मिडिल ईस्ट में ऐसे ड्रोन हमलों के जरिए हवाई अड्डों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. युद्ध के शुरुआती चरण में एक ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी, क्योंकि उस सैन्य बेस पर ड्रोन से सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी.

हालांकि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के कमांडर ब्रैड कूपर का कहना है कि ईरान की हमले करने की क्षमता कमजोर हुई है. उनके अनुसार बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में करीब 90% और ड्रोन हमलों में लगभग 83% की कमी आई है.

नए सुरक्षा उपायों पर काम

इन खतरों को देखते हुए Spectral-X जैसी रक्षा तकनीक कंपनियां नई तकनीकों पर काम कर रही हैं. कंपनी ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिससे सैनिकों, सैन्य वाहनों और उपकरणों को विजुअल, थर्मल, इन्फ्रारेड और रडार सेंसर से पहचानना मुश्किल हो जाए. इसके लिए एडवांस कैमोफ्लाज और सिग्नेचर-रिडक्शन तकनीक तैयार की जा रही है.

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