Pakistan Terror Attack: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में एक बार फिर आतंकवादी हमलों ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. बन्नू में हुए हमले के बाद अब लक्की मारवात में बड़ा आतंकी हमला हुआ है, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई. इन लगातार हो रहे हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि ये हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीजफायर लागू है और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पिछले कुछ महीनों से ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रही है. ऐसे में अब एक नए आतंकी संगठन का नाम सामने आ रहा है, जिसने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है.
#BREAKING: At least 9 killed, over 20 injured in explosion in northwestern Pakistan’s Lakki Marwat KPK. pic.twitter.com/D6kEybKVsE
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) May 12, 2026
लंबे समय से अशांत है खैबर पख्तूनख्वाह
खैबर पख्तूनख्वाह पाकिस्तान का वह इलाका है, जो अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है. यह क्षेत्र कई दशकों से आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा का केंद्र बना हुआ है. 1980 के दशक में सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान यहां कई कट्टरपंथी संगठनों ने अपनी जड़ें मजबूत की थीं. इसके बाद धीरे-धीरे यह इलाका अलग-अलग आतंकी गुटों का सुरक्षित ठिकाना बनता गया.
पिछले कुछ वर्षों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी का इस इलाके में काफी प्रभाव था. टीटीपी ने कई बार पाकिस्तानी सेना और पुलिस को निशाना बनाया. हालांकि हाल में अफगानिस्तान के साथ हुए समझौतों और सीजफायर के बाद टीटीपी की गतिविधियां कुछ कम हुई थीं. लेकिन अब नए हमलों ने साफ कर दिया है कि इलाके में आतंकवाद का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है.
कौन है इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन?
हाल ही में हुए हमलों की जिम्मेदारी इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन नाम के संगठन ने ली है. यह संगठन ज्यादा पुराना नहीं है और इसकी स्थापना साल 2025 में हुई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संगठन तीन अलग-अलग आतंकी गुटों को मिलाकर बनाया गया था. इनमें इस्लामिक क्रांति, लश्कर-ए-इस्लाम और हाफिज गुल बहादुर गुट शामिल हैं.
इन तीनों संगठनों का पहले भी पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में प्रभाव रहा है. खासकर हाफिज गुल बहादुर गुट का नाम पहले भी कई आतंकी गतिविधियों में सामने आ चुका है. दिलचस्प बात यह है कि एक समय पाकिस्तान सरकार ने हाफिज गुल बहादुर गुट को “गुड तालिबान” कहा था, क्योंकि यह संगठन सीधे पाकिस्तान सरकार के खिलाफ कम सक्रिय माना जाता था. लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं.
हमले का तरीका बाकी संगठनों से अलग
इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन का काम करने का तरीका दूसरे आतंकी संगठनों से थोड़ा अलग बताया जा रहा है. यह संगठन सीधे सेना के बड़े कैंप पर हमला करने के बजाय छोटे लेकिन खतरनाक आत्मघाती हमलों पर ज्यादा भरोसा करता है.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह संगठन खास टारगेट चुनकर हमला करता है ताकि कम संसाधनों में ज्यादा डर फैलाया जा सके. हाल के हमलों में भी इसी तरह की रणनीति देखने को मिली है.
सोशल मीडिया के जरिए बढ़ा रहा प्रभाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आतंकी संगठन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर काफी सक्रिय है. संगठन अपने मैसेज और प्रचार सामग्री पश्तो, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में पोस्ट करता है. इन पोस्ट के जरिए संगठन अपने समर्थकों तक पहुंचने और नए लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करता है.
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर लगाए आरोप
लगातार बढ़ रहे आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान के राजदूत को तलब किया है. पाकिस्तान का आरोप है कि इस नए आतंकी संगठन का संबंध अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से जुड़ा हुआ है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि कई आतंकी गुट अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं. हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
टीटीपी से जुड़े होने की भी चर्चा
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाफिज गुल बहादुर गुट पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का हिस्सा रह चुका है. इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन और टीटीपी के बीच अंदरूनी संबंध हो सकते हैं. कई ऐसे लड़ाकों की भी चर्चा है, जो पहले टीटीपी में थे और अब इस नए संगठन में सक्रिय हैं. हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
पाकिस्तान के लिए बढ़ सकती है नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नए आतंकी संगठन तेजी से मजबूत होते हैं, तो पाकिस्तान के लिए सुरक्षा हालात फिर मुश्किल हो सकते हैं. खैबर पख्तूनख्वाह और सीमावर्ती इलाकों में पहले से ही सेना और आतंकियों के बीच संघर्ष चलता रहा है.
अब नए गुटों के सक्रिय होने से स्थिति और जटिल हो सकती है. पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता कैसे बनाए रखे और नए आतंकी संगठनों को मजबूत होने से कैसे रोके.
क्यों चिंता बढ़ा रहे हैं ये हमले?
इन हमलों ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में इलाके में हिंसा कम होती दिखाई दे रही थी. लोगों को उम्मीद थी कि सीजफायर के बाद हालात सामान्य होंगे. लेकिन बन्नू और लक्की मारवात जैसे इलाकों में हुए ताजा हमलों ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
अब पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इस नए संगठन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन हमलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है.
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