Bihar News: बिहार सरकार ने जनजातीय समुदाय के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य के आठ जिलों में 19 नए छात्रावास बनाए जाएंगे, जिनके निर्माण पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 60 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. सरकार जल्द ही इस परियोजना के लिए संबंधित जिलों को राशि जारी करेगी, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू किया जा सके.
इन आठ जिलों को मिलेगा लाभ
नई योजना के तहत पश्चिम चंपारण, कटिहार, बांका, भागलपुर, जमुई, कैमूर, रोहतास और पूर्णिया जिले में छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा. प्रत्येक छात्रावास में 100 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी. इससे दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए सुरक्षित और बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी.
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी खर्च
इस परियोजना की कुल लागत 60.42 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है. इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 36.25 करोड़ रुपये होगी, जबकि शेष 24.17 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी. दोनों सरकारों की साझेदारी से इस योजना को तेजी से लागू करने की तैयारी की जा रही है.
PM जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत होगा निर्माण
सरकार ने यह फैसला प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के तहत लिया है. इस अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) तक शिक्षा, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है. सरकार का मानना है कि आवासीय सुविधाएं मिलने से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में छूटने की समस्या भी कम होगी.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर होगा संचालन
इन नए छात्रावासों का संचालन पहले से चल रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के सहयोग से संचालित होने वाले इन छात्रावासों में विद्यार्थियों को रहने, पढ़ने और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
15 से 18 वर्ष के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
इस योजना का मुख्य लक्ष्य 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के जनजातीय विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है. सरकार का मानना है कि सुरक्षित वातावरण, नियमित पढ़ाई और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता से इन छात्रों के शैक्षणिक स्तर में सुधार होगा और वे उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ सकेंगे.
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम
राज्य सरकार का यह फैसला जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन छात्रावासों का संचालन प्रभावी ढंग से किया गया, तो इससे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे.
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