तेल अवीव: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य-पूर्व के तेल और गैस के मार्गों के लिए एक नई पहल का प्रस्ताव दिया. उनका मानना है कि अरब प्रायद्वीप से तेल और गैस को इजरायल के बंदरगाहों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइनों का निर्माण किया जाना चाहिए. यह योजना होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी के अन्य क्षेत्रों में ईरान के बढ़ते खतरों को खत्म करने के उद्देश्य से है. अगर यह योजना सफल होती है, तो होर्मुज के सामरिक महत्व में कमी आ सकती है, और ईरान द्वारा की जा रही धमकियों का भी अंत हो सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प
नेतन्याहू ने अपनी योजना के तहत यह प्रस्ताव दिया है कि तेल और गैस की पाइपलाइनें अरब प्रायद्वीप से होकर इजरायल के बंदरगाहों तक पहुंचे. उनका कहना है कि इस तरह, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों की आवश्यकता को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है. इस पाइपलाइन नेटवर्क से इजरायल न केवल मध्य-पूर्व के ऊर्जा बाजार से जुड़ जाएगा, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक और सुरक्षा खतरों से भी मुक्ति मिल सकती है. नेतन्याहू के अनुसार, यह एक असली बदलाव होगा जो युद्ध के बाद की नई ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली की शुरुआत करेगा.
इजरायल का ऊर्जा नेटवर्क
नेतन्याहू ने अपने मॉडल में यह भी बताया कि अरब देशों का तेल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से इजरायल के हाइफा या अशदोद बंदरगाहों तक पहुंचेगा. इस पाइपलाइन के जरिए यूरोप को रूस या स्वेज नहर जैसे पारंपरिक मार्गों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी. इस परियोजना के तहत इजरायल, जो वर्तमान में इन पारंपरिक जलमार्गों का हिस्सा है, एक नई भूमिका निभाएगा और ऊर्जा आपूर्ति का एक नया केंद्र बन जाएगा. नेतन्याहू का कहना है कि इस तरह से इजरायल दुनिया के लिए एक 'एनर्जी लाइफलाइन' बन जाएगा.
पाइपलाइन योजना का संभावित प्रभाव
नेतन्याहू का यह प्लान अगर लागू हुआ तो न केवल मध्य-पूर्व का ऊर्जा बाजार बदल सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा नीति में भी एक नया मोड़ आ सकता है. इजरायल को इस नए ऊर्जा हब के रूप में स्थापित करने से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि तेल और गैस आपूर्ति की निर्भरता पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा. इस प्रस्ताव का एक और प्रमुख पहलू यह है कि इजरायल इस पाइपलाइन को अपनी रणनीतिक स्थिति के हिसाब से नियंत्रित कर सकेगा, जैसा आजकल ईरान करता है.
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