Israel War: पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात ने इजरायल की सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं. एक तरफ गाजा में हमास के साथ संघर्ष चल रहा है, तो दूसरी तरफ लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही और ईरान जैसे देश और संगठन अलग-अलग स्तर पर उसके लिए चुनौती बने हुए हैं. सीरिया और वेस्ट बैंक में भी इजरायल को सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं, तुर्की के साथ बढ़ती तनातनी ने उसकी कूटनीतिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं.
ऐसे में इजरायल के लिए चुनौती सिर्फ एक सीमा या एक संगठन तक सीमित नहीं रह गई है. अलग-अलग इलाकों में चल रहे तनाव के कारण उसे कई दिशाओं पर एक साथ नजर रखनी पड़ रही है.
गाजा में हमास सबसे बड़ी चुनौती
गाजा में हमास और इजरायल के बीच संघर्ष लंबे समय से जारी है. 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चलाया. इस कार्रवाई में संगठन के कई बड़े नेता मारे गए हैं, लेकिन हमास की सैन्य गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.
इजरायल के लिए गाजा इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां से होने वाले किसी भी हमले का सीधा असर उसकी सुरक्षा पर पड़ सकता है. इसी वजह से गाजा सीमा पर इजरायली सेना की मौजूदगी लगातार बनी हुई है.
वेस्ट बैंक में भी जारी है संघर्ष
इजरायल के सामने दूसरी बड़ी चुनौती वेस्ट बैंक से जुड़ी है. यहां फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद और अल-कुद्स ब्रिगेड जैसे हथियारबंद समूह सक्रिय हैं. जेनिन और तुल्कर्म जैसे इलाकों में इनके खिलाफ इजरायली सेना की कार्रवाई होती रही है.
हमास की अल-कस्साम ब्रिगेड की मौजूदगी की भी खबरें सामने आती रही हैं. इसके अलावा अल-अक्सा मार्टियर्स ब्रिगेड भी इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल रही है. यानी गाजा के अलावा वेस्ट बैंक भी इजरायल के लिए लगातार सुरक्षा चुनौती बना हुआ है.
ईरान से सीधा टकराव
इजरायल के लिए सबसे गंभीर क्षेत्रीय चुनौतियों में ईरान को माना जाता है. दोनों देशों के बीच सीधी सीमा नहीं है, लेकिन वर्षों से इनके बीच दुश्मनी चली आ रही है. दोनों एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य और राजनीतिक दबाव बनाते रहे हैं.
ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता इजरायल के लिए चिंता का विषय है. दूसरी ओर, इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी सैन्य गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है. यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव कई बार सीधे हमलों तक पहुंच चुका है.
सीरिया भी संवेदनशील मोर्चा
इजरायल और सीरिया के बीच भी दशकों से तनाव है. 1967 के युद्ध के बाद गोलान हाइट्स का बड़ा हिस्सा इजरायल के नियंत्रण में आ गया था. सीरिया आज भी इस इलाके पर अपना दावा करता है.
इजरायल समय-समय पर सीरिया में सैन्य ठिकानों पर हमले करता रहा है. उसका कहना है कि ईरान सीरिया के रास्ते क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश करता है. यही कारण है कि सीरियाई क्षेत्र भी इजरायल की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है.
लेबनान के साथ पुराना तनाव
इजरायल और लेबनान के रिश्ते भी लंबे समय से तनावपूर्ण हैं. दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं है. गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद लेबनान की सीमा पर तनाव और बढ़ गया.
सीमा पर गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई के कारण दोनों तरफ हालात कई बार गंभीर हुए हैं. इस पूरे मामले में लेबनान की धरती से सक्रिय हिजबुल्लाह की भूमिका सबसे अहम रही है.
हिजबुल्लाह से बड़ी चुनौती
हिजबुल्लाह और इजरायल की दुश्मनी कई दशक पुरानी है. 1982 में इजरायल के लेबनान अभियान के बाद हिजबुल्लाह का प्रभाव तेजी से बढ़ा. इसके बाद संगठन और इजरायल के बीच कई बार युद्ध और सैन्य संघर्ष हुए.
हिजबुल्लाह के पास रॉकेट और मिसाइलों का बड़ा जखीरा है और उसे ईरान का समर्थन प्राप्त है. इसी वजह से इजरायल इसे अपनी उत्तरी सीमा के लिए गंभीर खतरा मानता है.
यमन से हूतियों का दबाव
इजरायल की चिंता सिर्फ उसके आसपास के देशों तक सीमित नहीं है. यमन में सक्रिय हूती विद्रोही भी उसके खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं. गाजा युद्ध शुरू होने के बाद हूतियों ने फिलिस्तीनियों के समर्थन में इजरायल की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए.
लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने भी पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ाया. जवाब में इजरायल ने यमन में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं.
तुर्की के साथ बढ़ती तनातनी
अब इजरायल के लिए एक नई चिंता तुर्की के साथ बिगड़ते रिश्ते हैं. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर इजरायल की खुलकर आलोचना करते रहे हैं. दोनों देशों के बीच बयानबाजी और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर मतभेद बढ़े हैं.
हालांकि तुर्की और इजरायल के बीच फिलहाल सीधे युद्ध जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया में तुर्की की बढ़ती सक्रियता के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव जरूर बढ़ा है.
इस तरह इजरायल के सामने एक ही समय में अलग-अलग स्तर की कई चुनौतियां मौजूद हैं. कुछ खतरे सीधे सैन्य हैं, जबकि कुछ कूटनीतिक और क्षेत्रीय स्तर के हैं. आने वाले समय में इजरायल के लिए इन सभी मोर्चों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
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