नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कार्रवाई से सबक लेते हुए पाकिस्तान अपनी ड्रोन ताकत बढ़ाने में जुटा है. इसी कड़ी में पाकिस्तान ने तुर्की के चर्चित ड्रोन बायराकटार टीबी2 और बायराकटार अकिंजी को अपनी सेना में शामिल किया है. पाकिस्तान ने 2021-22 के दौरान करीब 10 से 12 टीबी2 और 6 से 8 अकिंजी ड्रोन खरीदने की डील की थी. यह सौदा पूरा हो चुका है. अब पाकिस्तान इन ड्रोन्स से जुड़ी तकनीक हासिल करने के लिए भी तुर्की से बातचीत कर रहा है.
पाकिस्तान का मकसद इन ड्रोन्स के जरिए अपनी सीमा के पास निगरानी और हमले की क्षमता बढ़ाना है. अब सवाल यह है कि तुर्की के ये ड्रोन भारतीय वायु रक्षा के सामने कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं.
बायराकटार टीबी2 कितना ताकतवर?
बायराकटार टीबी2 एक छोटा और हल्का लड़ाकू ड्रोन है. इसका इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया जाता है. इसकी ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता और लंबे समय तक हवा में रहने की वजह से यह सेना के लिए उपयोगी माना जाता है.
इसमें कम वजन वाले स्मार्ट हथियार लगाए जा सकते हैं. टीबी2 को खास तौर पर टैंकों, सैन्य वाहनों और दूसरे जमीनी ठिकानों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका ढांचा ऐसा है कि इसका रडार संकेत बड़े विमानों की तुलना में कम हो सकता है, हालांकि इससे यह पूरी तरह रडार से बच नहीं जाता.
इस ड्रोन की एक खासियत इसकी कम लागत भी है. लड़ाकू विमानों की तुलना में इसे चलाने और बनाए रखने का खर्च कम होता है, इसलिए इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना आसान हो सकता है.
बायराकटार अकिंजी है ज्यादा भारी
अकिंजी टीबी2 से काफी बड़ा और ज्यादा ताकतवर ड्रोन है. इसे भारी हथियार ले जाने के लिए तैयार किया गया है. यह करीब 1,500 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है और करीब 45,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है.
अकिंजी में दो इंजन और उन्नत रडार सिस्टम लगाया गया है. इसकी मदद से यह हवा और जमीन पर मौजूद कई लक्ष्यों की निगरानी कर सकता है. यह अलग-अलग तरह के बम और मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है.
सैटेलाइट से भी किया जा सकता है कंट्रोल
अकिंजी की एक बड़ी खासियत इसका सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम है. इसके जरिए ड्रोन को लंबी दूरी से नियंत्रित किया जा सकता है. हालांकि इसकी वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता सैटेलाइट लिंक, ईंधन और मिशन की परिस्थितियों पर निर्भर करती है.
इसमें कई आधुनिक कंप्यूटर और स्वचालित उड़ान से जुड़े सिस्टम भी दिए गए हैं. ये सिस्टम ड्रोन को उड़ान के दौरान कई काम अपने आप करने में मदद करते हैं. हालांकि जीपीएस जामिंग या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के हालात में इसकी क्षमता परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है.
टीबी2 और अकिंजी में कितना अंतर?
टीबी2 एक हल्का सामरिक लड़ाकू ड्रोन है, जबकि अकिंजी को भारी हमलों और लंबी दूरी के मिशन के लिए तैयार किया गया है. टीबी2 का अधिकतम उड़ान भार करीब 700 किलोग्राम और पेलोड करीब 150 किलोग्राम बताया जाता है. वहीं अकिंजी का अधिकतम उड़ान भार करीब 6,000 किलोग्राम और पेलोड करीब 1,500 किलोग्राम तक है.
टीबी2 की अधिकतम गति करीब 220 किलोमीटर प्रति घंटा और उड़ान की ऊंचाई करीब 25,000 फीट तक है. अकिंजी करीब 360 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है और करीब 45,000 फीट तक पहुंच सकता है. टीबी2 करीब 27 घंटे और अकिंजी करीब 24 घंटे तक हवा में रहने की क्षमता रखता है.
भारत के सामने कितनी बड़ी चुनौती?
पाकिस्तान इन ड्रोन्स को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन भारतीय सीमा में घुसना इनके लिए आसान नहीं होगा. भारत के पास कई स्तर वाली वायु रक्षा व्यवस्था है, जिसमें लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ मध्यम दूरी की प्रणालियां भी शामिल हैं.
भारत के पास एस-400 जैसी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है. इसके अलावा आकाश और दूसरी मिसाइल प्रणालियां भी ड्रोन जैसे हवाई खतरों से निपटने में भूमिका निभाती हैं. भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए स्वदेशी एंटी-ड्रोन तकनीक पर भी काम किया है.
ऐसे में पाकिस्तान के पास तुर्की के आधुनिक ड्रोन जरूर आ गए हैं, लेकिन इनकी मौजूदगी अपने आप में भारत की वायु रक्षा को चुनौती देने की गारंटी नहीं है. किसी भी ड्रोन की सफलता उसके इस्तेमाल की रणनीति, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मौसम, निगरानी और सामने मौजूद एयर डिफेंस पर निर्भर करेगी.
ये भी पढ़ें- पुतिन ने रोकी कीव पर बमबारी, 3 दिन तक नहीं होगा कोई हमला! रूस-यूक्रेन के बीच हो गया सीजफायर?