S-400 Air Defence System: दुनिया इस समय कई मोर्चों पर तनाव से जूझ रही है. अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ जंग और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं. ऐसे माहौल में दुनिया के कई देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के साथ-साथ एयर डिफेंस पर भी तेजी से काम कर रहे हैं. एक तरफ फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियार बनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ दुश्मन के हमलों को रोकने के लिए एयर डिफेंस और एंटी मिसाइल सिस्टम मजबूत किए जा रहे हैं.
भारत भी दोनों मोर्चों पर अपनी तैयारी बढ़ा रहा है. देश में कई आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, वहीं जरूरत के मुताबिक विदेशों से भी हथियार खरीदे जा रहे हैं. मिसाइल के क्षेत्र में भारत ने काफी आत्मनिर्भरता हासिल की है और फाइटर जेट के मामले में भी घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी बीच भारत ने रूस से S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम की 5 और यूनिट खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है.
रूस ने भेजा कीमत का प्रस्ताव
भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर में S-400 की 5 यूनिट खरीदने का समझौता किया था. इनमें से 4 यूनिट भारत को मिल चुकी हैं, जबकि पांचवीं और आखिरी यूनिट इस साल नवंबर में मिलने की उम्मीद है.
अब भारत 5 और S-400 सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है. ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने भारत को बिल ऑफ क्वांटिटीज यानी BOQ प्रस्ताव भेज दिया है. इसमें सिस्टम की तैनाती से जुड़े निर्माण और जरूरी सामान की लागत का ब्योरा दिया गया है.
रूस के इस प्रस्ताव के बाद दोनों देशों के बीच कीमत को लेकर बातचीत का रास्ता साफ हो गया है. कीमत तय होने और वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद इस सौदे पर अंतिम फैसला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी CCS की ओर से लिया जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी S-400 की ताकत
भारत के लिए S-400 की खरीद को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके प्रदर्शन से भी मजबूती मिली. मई 2025 में हुए ऑपरेशन के दौरान भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क में S-400 की अहम भूमिका बताई गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी लंबी दूरी की मिसाइल ने पाकिस्तान के अंदर करीब 314 किलोमीटर दूर एक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान को निशाना बनाया था. इसके अलावा पाकिस्तान की ओर से S-400 से लैस भारतीय एयरबेस को कामिकाजी ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश भी की गई थी. भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन खतरों का मुकाबला किया और पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को भारतीय सीमा के करीब आने से रोकने में अहम भूमिका निभाई.
चीन-पाकिस्तान की चुनौती के बीच बढ़ी तैयारी
चीन ने हाल के वर्षों में हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों की ताकत भी बढ़ाई है. वहीं पाकिस्तान अपनी सैन्य जरूरतों का बड़ा हिस्सा चीन से पूरा करता है. ऐसे में भारत के सामने एक साथ दो मोर्चों से पैदा होने वाले खतरे की चुनौती बनी हुई है.
इसी वजह से भारत अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है. S-400 की 5 अतिरिक्त यूनिट खरीदने की योजना को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है.
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