भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दुनिया के नए नक्शे को लेकर अपनी आपत्ति साफ कर दी है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका देश के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए. भारत के क्षेत्र को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाने की बात कही गई है. हालांकि, भारत ने साफ किया कि प्रस्ताव का समर्थन किसी एक खास नक्शे को मंजूरी देना नहीं है.
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को नए तरीके से दिखाने से जुड़ा प्रस्ताव पास किया. इससे किसी देश का वास्तविक क्षेत्रफल या सीमा नहीं बदलेगी. सिर्फ नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार पहले से कुछ अलग नजर आएगा.
नए नक्शे में क्या बदलेगा
अभी दुनिया में मर्केटर नक्शे का काफी इस्तेमाल होता है. इसमें ध्रुवों के पास के इलाके अपने वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं. नए तरीके को बराबर क्षेत्रफल वाला प्रोजेक्शन कहा जाता है. इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे दिखाई देंगे. एशिया के कुछ हिस्सों में भी अंतर नजर आ सकता है.
भारत की आपत्ति क्यों है
भारत को इस नए नक्शे के तरीके से आपत्ति नहीं है. उसने बराबर क्षेत्रफल दिखाने वाले नक्शे के प्रस्ताव का समर्थन किया है. उसकी चिंता सिर्फ इस बात को लेकर है कि भारत के इलाके को गलत तरीके से न दिखाया जाए.
Our response to media queries regarding a UN General Assembly resolution on equal-area world map ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 6, 2026
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे, नक्शा बनाने के तरीके या देशों की सीमाओं को मंजूरी नहीं देता. इसलिए भारत ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत उसका पूरा संप्रभु क्षेत्र आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए. भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा.
भारत का क्षेत्रफल नहीं बदलेगा
नए नक्शे से भारत की जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा. सिर्फ पृथ्वी को नक्शे पर दिखाने का तरीका बदलेगा.
भारत की आकृति थोड़ी अलग दिखाई दे सकती है, लेकिन इसमें बड़ा बदलाव नहीं होगा. भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए मर्केटर नक्शे में भी उसका आकार बहुत ज्यादा नहीं खिंचता.
नए नक्शे में यूरोप, रूस और कनाडा जैसे उत्तरी देशों की तुलना में भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है. अफ्रीका पर इसका असर सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने नक्शे की तुलना में काफी बड़ा दिखेगा.
मर्केटर नक्शे में क्या दिक्कत है
मर्केटर नक्शा दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक है. इसे जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था. इसका उद्देश्य समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था.
लेकिन पृथ्वी गोल होने की वजह से उसे सपाट नक्शे पर दिखाने में देशों और महाद्वीपों का आकार बदल जाता है. भूमध्य रेखा से दूर जाने वाले इलाके नक्शे पर ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं.
ग्रीनलैंड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के करीब-करीब बराबर दिखाई देता है, जबकि असल में दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है.
ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है. यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है. फिर भी पुराने नक्शे में दोनों लगभग एक जैसे नजर आ सकते हैं.
अफ्रीकी देशों ने बदलाव की मांग क्यों की
अफ्रीकी देशों का कहना है कि नक्शा सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं है, बल्कि यह लोगों की सोच को भी प्रभावित करता है. मर्केटर नक्शे में अफ्रीका वास्तविक आकार से काफी छोटा दिखाई देता है.
प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र किया गया है. कहा गया कि इन क्षेत्रों का छोटा दिखना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को कम आंकने वाली सोच पैदा कर सकता है.
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे शिक्षा और लोगों की सोच पर असर डालते हैं. यह प्रस्ताव टोगो ने रखा था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला.
फ्रांस भी बदलेगा नक्शा
संयुक्त राष्ट्र में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था. फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर नक्शे की जगह ऐसे नक्शे इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे.
फ्रांस एकर्ट चतुर्थ प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा. इसे जर्मन नक्शाकार मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने 1906 में बनाया था. एकर्ट चतुर्थ और बराबर क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन में देशों और महाद्वीपों का क्षेत्रफल वास्तविक अनुपात के करीब दिखाया जाता है.