ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को हुए नुकसान को लेकर अब तक का एक बड़ा आधिकारिक आकलन सामने आया है. पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की विशेष समीक्षा में बताया गया है कि ईरानी हमलों का असर मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैन्य ढांचे पर काफी व्यापक रहा. कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की इमारतों और सैन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा, वहीं लंबे सैन्य अभियान के चलते हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर भी दबाव बढ़ गया.
कई देशों में अमेरिकी ठिकाने प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतें और अन्य संरचनाएं ईरानी हमलों की चपेट में आईं. नुकसान के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM को सैनिकों, सैन्य उपकरणों और स्टोरेज सुविधाओं को अधिक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा. इससे क्षेत्र में अमेरिकी सेना की तैनाती और संचालन व्यवस्था में भी बदलाव आया.
हथियारों के भंडार पर बढ़ा दबाव
युद्ध का असर अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा. पेंटागन की समीक्षा में महत्वपूर्ण हथियारों और गोला-बारूद के भंडार में कमी का भी उल्लेख किया गया है. लंबे समय तक चले अभियान के कारण मिसाइलों समेत कई जरूरी सैन्य संसाधनों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा. इसी वजह से अमेरिका को अपनी सैन्य सप्लाई और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करना पड़ा.
मेडिकल इवैक्युएशन और लॉजिस्टिक्स में बदलाव
ईरानी हमलों के बीच इराक और कुवैत से अमेरिकी सेना के मेडिकल इवैक्युएशन हेलीकॉप्टरों को भी हटाना पड़ा. इसके बाद घायल सैनिकों को स्थानीय चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जमीनी रास्तों पर ज्यादा निर्भरता बढ़ी. वहीं बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स हब को भारी नुकसान हुआ, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के लिए सपोर्ट पोर्ट और सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया.
डिएगो गार्सिया पर बढ़ी निर्भरता
बहरीन में नुकसान के बाद अमेरिका ने हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया को वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया. हालांकि इसकी दूरी ने सप्लाई व्यवस्था को मुश्किल बना दिया. मध्य पूर्व तक सैन्य सामान पहुंचने में लगने वाला समय बढ़कर करीब 14 से 18 दिन हो गया. इसका असर जरूरी सामान की उपलब्धता और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की डाक व्यवस्था पर भी पड़ा.
अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को भी नुकसान
ईरान के हमलों से अमेरिकी राजनयिक सुविधाएं भी अछूती नहीं रहीं. पेंटागन, विदेश विभाग और USAID के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालयों से जुड़ी समीक्षा के अनुसार मध्य पूर्व में अमेरिकी राजनयिक सुविधाओं को करीब 184 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ. मार्च की शुरुआत में रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर दो ईरानी ड्रोन भी गिरे थे, जिससे परिसर को काफी नुकसान पहुंचा और वहां मौजूद CIA स्टेशन भी प्रभावित हुआ.
इराक में 600 से ज्यादा हमलों का दावा
रिपोर्ट में इराक स्थित अमेरिकी ठिकानों पर 600 से ज्यादा हमलों का जिक्र किया गया है. अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इन हमलों से करीब 157 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो अमेरिकी राजनयिक सुविधाओं में सबसे बड़ा नुकसान था. युद्ध के दौरान 23 फरवरी से 30 जून के बीच करीब 3,500 राजनयिक कर्मचारी क्षेत्र से बाहर रहे, जबकि कई जगह गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी इलाका छोड़ने का निर्देश दिया गया.
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