'सेना की उंगलियां ट्रिगर पर...' अमेरिका की धमकी पर ईरान ने दिया अल्टीमेटम, अब या तो डील होगी या जंग?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है.

Iran gave ultimatum on America threat either a deal or war
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तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. दोनों देशों के तीखे बयानों और सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व में हालात को और अस्थिर कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की गई, तो ईरान बिना देर किए पूरी ताकत से जवाब देगा.

हालांकि, इसी के साथ उन्होंने यह संकेत भी दिया कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है. बुधवार को दिए गए उनके बयानों में ईरान का रुख सख्त और कूटनीतिक दोनों रूपों में नजर आया.

सैन्य कार्रवाई पर ‘तुरंत जवाब’ की चेतावनी

विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है.

उनका कहना था कि ईरानी सैनिकों की उंगलियां ट्रिगर पर हैं और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ईरान के आसपास बढ़ती दिखाई दे रही है.

परमाणु समझौते पर बातचीत का संकेत

सख्त चेतावनी के साथ अराघची ने यह भी दोहराया कि ईरान हमेशा से निष्पक्ष और समान शर्तों वाले परमाणु समझौते के पक्ष में रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और परमाणु हथियार ईरान की सुरक्षा नीति का हिस्सा नहीं हैं.

ईरान का यह रुख कोई नया नहीं है, लेकिन पश्चिमी देश लंबे समय से इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं. इसके बावजूद, अराघची का कहना है कि अगर बातचीत ईमानदारी और बराबरी के आधार पर हो, तो तेहरान इसके लिए तैयार है.

ईरान के शीर्ष नेतृत्व के और सख्त तेवर

जहां विदेश मंत्री ने संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया, वहीं ईरान के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बयान कहीं ज्यादा आक्रामक नजर आए. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी ने चेतावनी दी कि किसी भी ‘सीमित हमले’ की धारणा पूरी तरह भ्रम है.

उनका कहना था कि अमेरिका या किसी अन्य देश की ओर से की गई किसी भी स्तर की सैन्य कार्रवाई को सीधे युद्ध की शुरुआत माना जाएगा. शमखानी ने यह भी कहा कि ईरान का जवाब बड़े पैमाने पर होगा और हमलावरों के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी निशाना बनाया जाएगा. उन्होंने तेल अवीव का नाम लेते हुए स्पष्ट संकेत दिए कि जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी.

ईरान की ओर बढ़ रही अमेरिकी नौसेना

तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा ईरान के पास के समुद्री इलाकों की ओर बढ़ रहा है. ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी बल तेजी और पूरी ताकत के साथ कार्रवाई करने में सक्षम है.

इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बयान देते हुए कहा कि मौजूदा समय में ईरानी नेतृत्व अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है. उनके इस बयान ने हालात को और ज्यादा गरमा दिया है.

यूरोप से भी ईरान पर दबाव

अमेरिका के अलावा यूरोपीय देशों की ओर से भी ईरान के खिलाफ सख्त बयान सामने आए हैं. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि ईरान में मौजूदा हालात को देखते हुए इस्लामिक गणराज्य के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं.

वहीं फ्रांस और जर्मनी ने यूरोपीय संघ से मांग की है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित किया जाए. इस मांग को यूरोप के कई अन्य देशों का भी समर्थन मिल रहा है.

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