Shaheed Diwas: हर साल 30 जनवरी को भारत में शहीद दिवस मनाया जाता है. यह दिन देशवासियों को उनके उन वीर नेताओं की याद दिलाता है जिन्होंने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया. सबसे प्रमुख रूप से इस दिन महात्मा गांधी को याद किया जाता है, जिनकी 1948 में हत्या कर दी गई थी. गांधीजी का जीवन सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से भरा रहा. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें हत्या से पहले कई बार जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ा था. इन घटनाओं को जानना न केवल गांधीजी की चुनौतियों को समझने में मदद करता है, बल्कि उनके अदम्य साहस और उनके आदर्शों को भी रेखांकित करता है.
शहीद दिवस पर यह जानकारी विशेष रूप से UPSC, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए भी उपयोगी हो सकती है.
महात्मा गांधी पर हुए हमले: एक संक्षिप्त इतिहास
mkgandhi.org के अनुसार, महात्मा गांधी पर उनके जीवनकाल में पांच से अधिक जानलेवा हमले हुए. गांधीजी खुद इस पर हैरान थे और अक्सर पूछते थे कि “जब मैं किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता, तो जान लेने की इतनी कोशिशें क्यों हुईं?”
उन पर हमले न केवल भारत में, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में भी किए गए, जहां कई बार उनकी जान लेने की कोशिश की गई और उन्हें धमकियां मिलीं.
1. पहला हमला: हरिजन यात्रा, 25 जून 1934
महात्मा गांधी पर पहला जानलेवा हमला 25 जून 1934 को पुणे में हुआ, जब वे अपनी हरिजन यात्रा पर थे. चरमपंथियों ने उनके ऊपर हैंड ग्रेनेड फेंका, जो उनके सामाजिक सुधार और हरिजन उत्थान के काम का विरोध कर रहे थे. ग्रेनेड गांधी को नहीं लगा, लेकिन अधिकारियों को मामूली चोटें आईं. इस हमले के बावजूद गांधीजी ने अपना कार्यक्रम जारी रखा.
2. दूसरा हमला: पंचगनी, जुलाई 1944
जुलाई 1944 में गांधीजी पर पंचगनी में हमला हुआ. इस दौरान नाथूराम गोडसे जैसी चरमपंथी ताकतों ने उन्हें निशाना बनाया. गांधीजी शांत रहे और हमलावर से बातचीत के लिए आमंत्रित किया, लेकिन गोडसे ने इससे इनकार कर दिया. यह हमला चरमपंथी समूहों से बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता था.
3. तीसरा हमला: सेवाग्राम, सितंबर 1944
सितंबर 1944 में सेवाग्राम में गांधीजी पर तीसरी बार हमला हुआ, जब वे जिन्ना से मिलने की तैयारी कर रहे थे. इस दौरान नाथूराम गोडसे और एलजी थत्ते ने चाकू दिखाकर उन्हें रोकने की कोशिश की और उन्हें धमकियां दी गईं.
4. चौथा हमला: पुणे जाने वाली ट्रेन, 29 जून 1946
29 जून 1946 को गांधीजी पुणे जा रहे थे. इस दौरान कुछ हमलावरों ने रेल पटरियों पर पत्थर रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की. ड्राइवर ने समय रहते इमरजेंसी ब्रेक लगाकर हादसा टाल दिया. गांधीजी को इसकी जानकारी नहीं मिली, वे सोते रहे. रेलवे रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि यह घटना जानबूझकर की गई थी.
5. हत्या: बिरला हाउस, 30 जनवरी 1948
30 जनवरी 1948 को बिरला हाउस, दिल्ली में गांधीजी की संध्या प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे ने उन पर गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी. इससे पहले भी मदनलाल पाहवा ने उस दिन बम फेंकने की कोशिश की थी, लेकिन बम गांधीजी तक नहीं पहुंचा. कई हमलों और चेतावनियों के बावजूद गांधीजी हमेशा अपने आदर्शों पर अडिग रहे.
30 जनवरी: शहीद दिवस का महत्व
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है. यह दिन केवल उनके बलिदान को याद करने का नहीं, बल्कि उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को भी याद करने का अवसर है. गांधीजी ने अपने जीवन में यह साबित किया कि असत्य और हिंसा के खिलाफ धैर्य और साहस से लड़ाई लड़ना संभव है.
शहीद दिवस पर स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक संस्थान विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिसमें गांधीजी के जीवन, उनके विचार और उनके द्वारा किए गए सामाजिक सुधारों को याद किया जाता है.
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