Iran-America Tension: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं, और अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है. पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीति के प्रयासों के बावजूद, यह संघर्ष अब युद्ध के कगार तक पहुंचने का संकेत दे रहा है. हालिया घटनाओं और सैन्य तैयारियों से यह स्पष्ट हो रहा है कि अमेरिका की ईरान पर हमले की योजना अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई का रूप ले सकती है.
बड़ी सैन्य कार्रवाई की संभावना
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी सैन्य टकराव का दायरा सीमित नहीं होगा. यह एक छोटे ऑपरेशन की तरह नहीं होगा, बल्कि एक बड़ा सैन्य अभियान हो सकता है, जो कई हफ्तों तक चलेगा. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह कार्रवाई पिछले महीने वेनेजुएला में हुई सीमित कार्रवाई से भी कहीं ज्यादा बड़ी होगी. इसके परिणामस्वरूप मिडिल ईस्ट में एक बड़े युद्ध की संभावना बन सकती है, जो न केवल क्षेत्र बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकता है.
रमजान के दौरान युद्ध की आशंका
19 फरवरी से रमजान की शुरुआत होने वाली है, और यह महीना कुछ देशों के लिए तनाव का माहौल उत्पन्न कर सकता है. माना जा रहा है कि इस महीने सैन्य कार्रवाई की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस समय ईरान को परमाणु समझौते में वापस लाने के प्रयासों के साथ-साथ युद्ध की तैयारी भी कर रहा है. हालांकि, फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है.
जिनेवा में हुई महत्वपूर्ण बातचीत
हाल ही में जिनेवा में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन घंटे लंबी बातचीत की. दोनों पक्षों ने बातचीत में कुछ प्रगति होने की बात कही, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर अभी भी काफी मतभेद बने हुए हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी बातचीत के दौरान यह संकेत दिया कि अगर कूटनीति विफल रही, तो सैन्य विकल्प को खुले तौर पर लिया जा सकता है.
अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य तैयारी
अभी तक की स्थिति को देखते हुए, यह संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं. इस ऑपरेशन का दायरा पिछले साल जून में हुए 12 दिन के संघर्ष से कहीं अधिक हो सकता है, जिसमें अमेरिका ने ईरान की अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया था. अगर ऐसा होता है, तो इस संघर्ष का असर पूरी मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ेगा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी वर्षों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है.
क्या अगले दो हफ्तों में फैसला होगा?
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत को और बढ़ा दिया है. उसने दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनभर वॉरशिप, सैकड़ों लड़ाकू विमान और कई एयर डिफेंस सिस्टम क्षेत्र में तैनात किए हैं. इसके अलावा, 150 से ज्यादा मिलिट्री कार्गो विमानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजे गए हैं. हाल ही में 50 और लड़ाकू विमान भी क्षेत्र में पहुंच चुके हैं. सूत्रों का कहना है कि अगले दो हफ्तों के भीतर अगर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आया, तो स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है.
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