Kirana Hills Strike: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. अब हवाई युद्ध के जाने-माने विश्लेषक और इतिहासकार Tom Cooper ने एक बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि Indian Air Force ने पाकिस्तान के किराना पहाड़ियों पर सटीक हमला किया था, जिससे पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा.
हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक रूप से किराना पहाड़ियों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि उपलब्ध संकेत और दृश्य प्रमाण कुछ और कहानी बताते हैं.
सोशल मीडिया के वीडियो का हवाला
टॉम कूपर ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तानी सामाजिक माध्यमों पर कई वीडियो सामने आए. इन वीडियो में मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और वहां टकराते दिखाई देते हैं.
एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार केंद्र से धुआं उठता नजर आता है. कूपर के अनुसार भारत ने सबसे पहले रडार केंद्रों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को कमजोर किया. इसके बाद भूमिगत भंडारण स्थलों के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर प्रहार किया गया.
पाकिस्तानी जवाबी कार्रवाई नाकाम
कूपर का दावा है कि उस समय पाकिस्तान का अभियान ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ असफल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े स्तर पर विफल कर दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12 से 13 हवाई अड्डों को निशाना बनाया. अंत में किराना पहाड़ियों पर कथित हमला पाकिस्तान के लिए निर्णायक साबित हुआ.
कूटनीतिक हलचल भी तेज
हमलों के दौरान कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई थी. कूपर के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए थे. इसे वह इस बात का संकेत मानते हैं कि पाकिस्तान आगे लड़ाई बढ़ाने की स्थिति में नहीं था.
किराना पहाड़ियों का महत्व
किराना पहाड़ियों को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. बताया जाता है कि यहां कई परमाणु परीक्षण हो चुके हैं और बड़ी संख्या में मजबूत आश्रय स्थल और भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं.
कूपर का तर्क है कि इतनी संवेदनशील जगह पर हमला तभी किया जाता है जब एक स्पष्ट संदेश देना हो कि जरूरत पड़ने पर किसी भी स्थान को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब इतने संकेत मौजूद हैं तो भारत आधिकारिक रूप से हमले से इनकार क्यों करता है.
हथियारों और रणनीति की चर्चा
टॉम कूपर के अनुसार भारत को इस कार्रवाई में किसी विशेष गुप्त तकनीक की आवश्यकता नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं. जगुआर विमानों ने भी रैम्पेज का उपयोग किया और राफेल विमानों ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. उन्होंने भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली की विशेष सराहना की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
रणनीतिक जीत का आकलन
कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. उनके अनुसार किराना पहाड़ियों पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और आधुनिक तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है. हालांकि इस पूरे मामले में आधिकारिक बयान और दावे अलग-अलग हैं, लेकिन कूपर के विश्लेषण ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है.
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