रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा भारत, अमेरिका ने बढ़ाई छूट, ट्रंप प्रशासन ने क्यों लिया यूटर्न?

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर जारी छूट को अमेरिका ने आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इस कदम से भारत जैसे देशों को सीधा फायदा होगा, जो पहले से ही रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहे हैं.

India will continue to buy oil from Russia US Extends Waiver
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर जारी छूट को अमेरिका ने आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इस कदम से भारत जैसे देशों को सीधा फायदा होगा, जो पहले से ही रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहे हैं.

अमेरिका ने क्यों बदला फैसला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर दी गई प्रतिबंध छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है.

खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका ने यू-टर्न लेते हुए इस राहत को जारी रखने का फैसला किया.

नया लाइसेंस क्या कहता है?

अमेरिकी वित्त विभाग ने एक नया आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि 17 अप्रैल से 16 मई के बीच समुद्र में पहले से लदे रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति दी जाएगी. यह नया आदेश पहले समाप्त हो चुकी 30 दिन की छूट की जगह लेता है.

इसका मतलब है कि जो तेल पहले से टैंकरों में मौजूद है, उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदा और बेचा जा सकेगा, जिससे आपूर्ति बाधित नहीं होगी.

किन देशों को मिलेगा फायदा?

इस फैसले से भारत जैसे देशों को सबसे ज्यादा लाभ होने की संभावना है. भारत पहले से ही रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले भी इस तरह की छूट मिलने के बाद भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल का आयात किया था. बताया जाता है कि भारत ने लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया था, जिससे देश को सस्ता ईंधन उपलब्ध हो सका.

वैश्विक तनाव का असर

अमेरिका का यह फैसला केवल रूस तक सीमित है. ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देशों पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि तेल की सप्लाई में अचानक कमी न आए और कीमतें नियंत्रण में रहें.

क्या आगे भी मिल सकती है छूट?

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो भविष्य में इस तरह की छूट को और आगे बढ़ाया जा सकता है.

कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए विकल्प सीमित होते जा रहे हैं, इसलिए ऐसी राहत जरूरी हो सकती है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में रूस से सस्ता तेल मिलना देश के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होता है.

सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिलने से न सिर्फ आयात बिल कम होता है, बल्कि देश में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिलती है. यही वजह है कि अमेरिका के इस फैसले को भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

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