US Tariff: अमेरिका में टैरिफ को लेकर हाल के घटनाक्रम ने भारतीय निर्यातकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आपातकालीन अधिकारों के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराया. इसके तुरंत बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. ऐसे में सवाल यह है कि अब भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर आखिर कितना टैक्स लगेगा- 18%, 10% या फिर सिर्फ 3%?
पहले क्या स्थिति थी?
अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था. इसमें:
बाद में 6 फरवरी को एक कार्यकारी आदेश के जरिए रूस से जुड़े 25 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्से को हटा दिया गया. इसके बाद प्रभावी टैरिफ 25 प्रतिशत रह गया.
इसके बाद अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के ढांचे पर बातचीत हुई और उम्मीद बनी कि टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत तक आ जाएगा. हालांकि यह कमी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी नियमों के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है.
इस फैसले के बाद भारत की स्थिति फिर से “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (MFN) श्रेणी में लौट आई. इस श्रेणी के तहत भारतीय सामानों पर औसतन लगभग 3 प्रतिशत का टैरिफ लगता था.
यानी अगर कोर्ट के फैसले को आधार मानें, तो भारतीय निर्यात पर बेसलाइन ड्यूटी करीब 3 प्रतिशत रहनी चाहिए.
फिर 10% ग्लोबल टैरिफ कहां से आया?
कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत का अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है, जब तक कांग्रेस कोई फैसला न करे.
इसका मतलब यह है कि:
ऐसे में कुल प्रभावी टैरिफ लगभग 13 प्रतिशत तक हो सकता है, अगर दोनों लागू होते हैं.
भारत के लिए ट्रंप ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ मौजूदा व्यापार ढांचे में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका को टैरिफ देता है, जबकि अमेरिका भारत को टैरिफ नहीं दे रहा.
उन्होंने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में सेक्शन 301 के तहत और जांच हो सकती है, जिससे अतिरिक्त टैरिफ लग सकते हैं. फिलहाल चीन, कनाडा और मेक्सिको इस तरह के टैरिफ का सामना कर रहे हैं.
किन सेक्टरों पर क्या असर?
तो आखिर अंतिम गणित क्या है?
स्थिति को आसान भाषा में समझें:
यानी अभी के लिए ज्यादातर भारतीय सामान पर प्रभावी टैरिफ करीब 13% के आसपास बैठ सकता है (3% 10%), जबकि कुछ सेक्टरों में अलग नियम लागू रहेंगे.
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