पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को करीब 15 दिन हो चुके हैं और इस दौरान अमेरिका को सैन्य स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है, जिससे कुछ विमान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई सैनिक हताहत हुए हैं.
खबरों के अनुसार ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी वायुसेना के पांच KC-135 रिफ्यूलिंग विमान जमीन पर खड़े-खड़े क्षतिग्रस्त हो गए. ये विमान लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन देने के लिए इस्तेमाल होते हैं और सैन्य अभियानों के लिए काफी अहम माने जाते हैं.
अमेरिका का कहना है कि इन विमानों को पूरी तरह नष्ट नहीं किया गया है और उन्हें मरम्मत के लिए भेजा गया है. इस हमले में किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है.
इराक में विमान हादसा
इससे एक दिन पहले इराक के पश्चिमी इलाके में एक और KC-135 रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में सवार सभी छह क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. इस घटना की पुष्टि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने की है.
एयर ऑपरेशंस पर असर
रिपोर्टों के मुताबिक क्षतिग्रस्त रिफ्यूलिंग विमानों की वजह से अमेरिकी एयर ऑपरेशंस पर असर पड़ा है. ये विमान F-15, F-16 और B-52 जैसे लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन देने के लिए उपयोग किए जाते हैं. इनके अस्थायी रूप से बाहर होने से कुछ मिशनों में देरी की बात सामने आई है.
अन्य घटनाएं भी सामने आईं
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि कुवैत में एक अमेरिकी एयरबेस के पास सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था, जहां संदिग्ध मिसाइल या ड्रोन गतिविधि देखी गई थी. कुछ रिपोर्टों में तीन फाइटर जेट के क्रैश होने की बात भी सामने आई, हालांकि अमेरिका और कुवैत ने इसे ईरानी हमले की बजाय तकनीकी या ‘फ्रेंडली फायर’ से जुड़ी घटना बताया.
सैनिकों को भी नुकसान
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी से मानी जा रही है. इस दौरान ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों में अब तक कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत और करीब 140-150 सैनिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है.
इराक में हुए विमान हादसे में मारे गए छह सैनिकों के शव अमेरिका के डोवर एयर फोर्स बेस पहुंचाए गए, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
ईरान और अमेरिका के दावे
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नेईनी ने दावा किया है कि ईरान के पास अभी और नई मिसाइलें हैं और वह लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार है.
वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमलों से नुकसान सीमित है और अमेरिकी सैन्य क्षमता अभी भी मजबूत बनी हुई है.
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