चालबाज चीन की खुल गई पोल! ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की मदद कर रहा था 'ड्रैग्न', अमेरिकी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर के 7 महीने बाद पेंटागन की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी है, जिसके मुताबिक भारत को सिर्फ पाकिस्तान से ही नहीं, बल्कि चीन से भी मुकाबला करना पड़ा था. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीन प्रमुख तरीकों से मदद की थी, बिना सीधे युद्ध में शामिल हुए.

How China Aided Pakistan in Operation Sindoor Reveals Pentagon Report
Image Source: ANI/ File

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में हुआ ऑपरेशन सिंदूर आज भी रक्षा रणनीतिकारों और इतिहासकारों के बीच चर्चा का विषय है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए. हालांकि, यह युद्ध भले ही सीजफायर पर खत्म हुआ हो, लेकिन इसके परिणाम ने पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करवा दिया. अब ऑपरेशन सिंदूर के 7 महीने बाद पेंटागन की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी है, जिसके मुताबिक भारत को सिर्फ पाकिस्तान से ही नहीं, बल्कि चीन से भी मुकाबला करना पड़ा था. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीन प्रमुख तरीकों से मदद की थी, बिना सीधे युद्ध में शामिल हुए.

चीन का ‘ग्रे-जोन’ रणनीति में इस्तेमाल

चीन ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को मदद देने के लिए एक नई और प्रभावी रणनीति अपनाई – 'ग्रे-जोन' रणनीति. इसमें पाकिस्तान को सामने रखा गया, जो भारत से सीधा मुकाबला कर रहा था, जबकि चीन ने पूरी तरह से बैकहेंड से सहायता की. इस रणनीति के तहत चीन ने तीन प्रमुख तरीकों से पाकिस्तान को मदद दी:

खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस सपोर्ट)

चीन ने अपने सैटेलाइट नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए पाकिस्तान को भारत की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग उपलब्ध करवाई. इससे पाकिस्तान के लिए भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन करना संभव हो गया.

सूचना युद्ध (Information Warfare)

चीन ने डिजिटल मीडिया और सोशल नेटवर्क्स का इस्तेमाल करते हुए भारत के आरोपों को धुंधला किया. इसके माध्यम से पाकिस्तान के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई. इस तरह के सूचना अभियानों से पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिलने की संभावना बढ़ी.

साइबर हमले और कूटनीतिक दबाव

चीन ने साइबर हमलों और कूटनीतिक मैन्यूवरिंग के द्वारा संघर्ष को बढ़ने से रोका, लेकिन भारत पर निरंतर दबाव बनाए रखा. इसके द्वारा पाकिस्तान को अतिरिक्त सैन्य दबाव से बचने की रणनीति बनाई गई.

चीन की युद्ध रणनीति की क्या वजह थी?

पेंटागन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन भारत को अपनी प्रमुख रणनीतिक चुनौती मानता है. पाकिस्तान को उसने एक 'प्रेशर वॉल्व' के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि भारत अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने में सक्षम न हो. इसके जरिए चीन ने यह सुनिश्चित किया कि भारत हमेशा पाकिस्तान के खिलाफ रणनीतिक रूप से व्यस्त रहे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर को 'ग्रे-जोन' रणनीति के तहत एक प्रयोग के रूप में देखा, ताकि भारत पर साइबर, इकोनॉमिक कोएर्शन और प्रॉक्सी अस्थिरता का दबाव डाला जा सके.

भारत के लिए नई चुनौती

चीन और पाकिस्तान का यह गठजोड़ भारत के लिए एक नई चुनौती पेश करता है. अब भारत को सिर्फ पाकिस्तान से नहीं, बल्कि एक संयुक्त 'हाइब्रिड' खतरे के लिए तैयार रहना होगा, जिसमें चीन और पाकिस्तान दोनों की रणनीतियों का सम्मिलित प्रभाव होगा. पेंटागन की रिपोर्ट ने भारत को चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे और भी संयुक्त खतरे सामने आ सकते हैं, जिनसे निपटने के लिए एक और भी सशक्त रक्षा रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है.

ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान की हार, भारत की जीत

ऑपरेशन सिंदूर 2025 में एक निर्णायक संघर्ष था, जो 7 मई से 10 मई तक चला. यह संघर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या के बाद हुआ, जब भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए. पाकिस्तान ने इसे एक सिविलियन हमला बताया, जबकि भारत ने इसे आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने वाला सैन्य अभियान करार दिया. यह संघर्ष दोनों देशों के बीच हवाई और मिसाइल हमलों के साथ एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचा, लेकिन अंत में भारत ने निर्णायक बढ़त बना ली.

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