तेहरान: ईरान इस समय सिर्फ अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव का सामना नहीं कर रहा, बल्कि देश के अंदर भी राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उनकी सरकार को लेकर कट्टरपंथी नेताओं का विरोध खुलकर सामने आ रहा है. इसी वजह से ईरान की राजनीति में तख्तापलट जैसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
राष्ट्रपति के खिलाफ लगे नारे
हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को विरोध का सामना करना पड़ा. कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए और अमेरिका के साथ बातचीत का विरोध किया. विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर रहे. रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान उनके खिलाफ भी गुस्सा देखने को मिला.
'सॉफ्ट तख्तापलट' का आरोप क्यों?
कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सरकार के कुछ बड़े नेता अमेरिका के साथ समझौते के जरिए देश की नीति बदलने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार संसद और कट्टरपंथी गुटों की भूमिका कमजोर कर रही है और पुराने क्रांतिकारी सिद्धांतों से दूर जा रही है.
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
कट्टरपंथी नेताओं ने जताई नाराजगी
कुछ कट्टरपंथी नेताओं और सांसदों ने सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की. उनका कहना है कि देश के अंदर बड़ी राजनीतिक साजिश चल रही है और जनता को सतर्क रहने की जरूरत है. इन बयानों के बाद ईरान की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है.
नए सुप्रीम लीडर को लेकर भी चर्चा
इस पूरे विवाद के बीच नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. वह लंबे समय से किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए हैं. इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इनमें से किसी की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
राष्ट्रपति को मिली खुली धमकी
राष्ट्रपति पेजेशकियन के खिलाफ कुछ कट्टरपंथी समर्थकों ने सख्त बयान भी दिए हैं. एक धार्मिक कार्यक्रम में सरकार विरोधी मंच से उन्हें खुली चेतावनी दी गई. इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ, लेकिन अब तक इस मामले में किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है.
अमेरिका के साथ बातचीत और हालिया समझौतों को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं. एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रही है, जबकि दूसरी ओर कट्टरपंथी गुट इसका लगातार विरोध कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.
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