Kaveri Jet Engine: भारत के स्वदेशी कावेरी जेट इंजन प्रोजेक्ट को एक बार फिर नई उम्मीद मिली है. तेजस फाइटर प्रोग्राम से बाहर होने के करीब 18 साल बाद अब इस इंजन पर दोबारा तेजी से काम हो रहा है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के वैज्ञानिकों को अगले 5 से 7 साल में छठी पीढ़ी के फाइटर इंजन विकसित करने का लक्ष्य दिया है. इसके बाद कावेरी इंजन प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है. हाल ही में कावेरी इंजन के सफल आफ्टरबर्नर टेस्ट और भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों से इस प्रोजेक्ट को नई दिशा मिली है.
तेजस के लिए नहीं हो पाया था सफल
कावेरी इंजन को साल 1989 में तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए बनाया गया था. इसका उद्देश्य भारत को अपना स्वदेशी फाइटर इंजन देना था. लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह इंजन भारतीय वायु सेना की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाया.
तेजस के लिए करीब 83-85 kN थ्रस्ट की जरूरत थी, जबकि कावेरी इंजन लगभग 70-72 kN थ्रस्ट ही दे पाया. इसके अलावा इंजन का वजन भी ज्यादा था और टर्बाइन ब्लेड व कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी कई समस्याएं सामने आईं. इसके बाद साल 2008 में इसे तेजस प्रोग्राम से अलग कर दिया गया.
कई मुश्किलों से गुजरा प्रोजेक्ट
कावेरी इंजन प्रोजेक्ट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद लगे प्रतिबंधों और भारत में आधुनिक इंजन टेस्टिंग सुविधाओं की कमी ने भी इसकी रफ्तार धीमी कर दी. हालांकि, प्रोजेक्ट को बंद नहीं किया गया और इससे मिली तकनीक पर आगे काम जारी रहा.
कावेरी 2.0 पर चल रहा काम
अब कावेरी इंजन के नए वर्जन पर काम किया जा रहा है. इसे कावेरी 2.0 या अपग्रेडेड कावेरी इंजन कहा जा रहा है. इसका लक्ष्य करीब 81-83 kN थ्रस्ट पैदा करना है. यह भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है. इसके अलावा कावेरी इंजन से जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल घातक स्टेल्थ ड्रोन और मरीन गैस टर्बाइन जैसे रक्षा प्रोजेक्ट में भी किया जा रहा है.
भारत अभी भी विदेशी इंजनों पर निर्भर
कई सालों की कोशिशों के बावजूद भारत के ज्यादातर आधुनिक लड़ाकू विमान अभी विदेशी इंजन पर निर्भर हैं. तेजस Mk-1 और Mk-1A में अमेरिकी कंपनी GE के इंजन लगाए गए हैं. वहीं तेजस Mk-2 और AMCA के शुरुआती मॉडल में भी GE F414 इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा. हाल ही में विदेशी इंजन की सप्लाई में देरी के कारण विमान उत्पादन पर भी असर पड़ा था. इससे स्वदेशी इंजन की जरूरत और ज्यादा महसूस हुई.
AMCA के लिए बड़ी उम्मीद
भारत के भविष्य के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA के लिए स्वदेशी इंजन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शुरुआती AMCA प्रोटोटाइप विदेशी इंजन से उड़ान भर सकते हैं, लेकिन लंबे समय में लक्ष्य इसे पूरी तरह भारतीय इंजन से लैस करना है. इसके लिए सरकार एयरो इंजन तकनीक को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिसमें DRDO, भारतीय कंपनियां और रिसर्च संस्थान मिलकर काम करेंगे.
कावेरी इंजन से मिली तकनीक बनेगी ताकत
भले ही कावेरी इंजन तेजस में इस्तेमाल नहीं हो पाया, लेकिन इस प्रोजेक्ट से भारत ने इंजन डिजाइन, टर्बाइन तकनीक और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम के क्षेत्र में काफी अनुभव हासिल किया है. यही तकनीक आने वाले समय में भारत के नए और आधुनिक सैन्य इंजनों की नींव बन सकती है.
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