गाजा शांति प्लान में भारत की एंट्री? ट्रंप का PM मोदी को खास न्योता, पाकिस्तान भी बोर्ड में शामिल!

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच गाजा को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल सामने आई है. अमेरिका अब गाजा में शांति, शासन और पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच गाजा को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल सामने आई है. अमेरिका अब गाजा में शांति, शासन और पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को इस प्रस्तावित बोर्ड का हिस्सा बनने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. खास बात यह है कि इस सूची में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है.


भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस पहल की जानकारी सार्वजनिक की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र साझा करते हुए बताया कि भारत को गाजा के लिए गठित होने वाले बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह बोर्ड उन देशों के समूह के रूप में काम करेगा, जिन्हें गाजा पट्टी में भविष्य की प्रशासनिक और गवर्नेंस व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. ट्रंप की शांति योजना के तहत हमास पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह इस क्षेत्र में अपनी शासन संबंधी भूमिका से पीछे हटे.

शांति योजना का अगला चरण

अमेरिका की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, यह बोर्ड ट्रंप की 20 बिंदुओं वाली व्यापक शांति योजना का हिस्सा है. इस पहल का उद्देश्य गाजा में स्थायी शांति कायम करना, प्रशासनिक ढांचा तैयार करना, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, पुनर्निर्माण को गति देना और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है.सूत्रों का कहना है कि इस अंतरराष्ट्रीय पहल के लिए करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है. इनमें भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान भी शामिल है. अमेरिका अब इस योजना के दूसरे चरण को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुटा हुआ है.

क्यों अहम है भारत की भूमिका

गाजा पीस बोर्ड में भारत की भागीदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत के इजरायल और फिलिस्तीन—दोनों के साथ ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं. संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत मिस्र के रास्ते गाजा में मानवीय सहायता भी भेजता रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही बंधकों की रिहाई और मानवीय राहत बढ़ाने से जुड़े समझौतों का समर्थन कर चुके हैं. साथ ही भारत ने स्पष्ट रुख दोहराया है कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और स्थायी शांति के लिए संवाद जरूरी है.

बोर्ड ऑफ पीस में कौन-कौन शामिल

प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस के चेयरमैन खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे. इसके अलावा इस बोर्ड में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हैं, जिनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के वरिष्ठ राजनयिक अली अल-थवादी शामिल बताए जा रहे हैं.

हालांकि, इस बोर्ड को लेकर विवाद भी सामने आ रहे हैं. इजरायल ने तुर्की और कतर की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है, क्योंकि वह इन देशों को हमास के प्रति नरम रुख रखने वाला मानता है. वहीं, फिलिस्तीनी संगठन इस्लामिक जिहाद ने भी इस पहल को इजरायल के हितों को आगे बढ़ाने वाला कदम करार दिया है. कुल मिलाकर, गाजा को लेकर यह नया कूटनीतिक प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा का विषय बन गया है. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि भारत समेत आमंत्रित देश इस बोर्ड में शामिल होकर किस तरह की भूमिका निभाते हैं और क्या यह पहल गाजा में स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस रास्ता खोल पाएगी.

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