भारतीय वायुसेना को मिलेगा 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट? सिर्फ राफेल से नहीं चलेगा काम, जल्द होगी डील!

भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रही है. बदलते सुरक्षा हालात, चीन और पाकिस्तान से जुड़े खतरे और दो मोर्चों पर युद्ध की आशंका को देखते हुए अब ऐसा संकेत मिल रहा है कि भारत सरकार वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़े और निर्णायक कदम उठाने जा रही है.

India will buy Russia fifth generation fighter jet Sukhoi-57
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

Su-57 Fighter Jet: भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रही है. बदलते सुरक्षा हालात, चीन और पाकिस्तान से जुड़े खतरे और दो मोर्चों पर युद्ध की आशंका को देखते हुए अब ऐसा संकेत मिल रहा है कि भारत सरकार वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़े और निर्णायक कदम उठाने जा रही है. इसी कड़ी में फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव पर जल्द सरकारी मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है.

इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अब रूसी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट सुखोई-57 (Su-57) को लेकर भी गंभीरता से विचार कर रहा है. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत राफेल के साथ-साथ रूस से भी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स खरीदेगा?

सुखोई-57 को लेकर रिपोर्ट का इंतजार

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अभी रूस से एक अहम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. यह रिपोर्ट भारत में सुखोई-57 फाइटर जेट्स के निर्माण की संभावित लागत से जुड़ी होगी.

फिलहाल सुखोई-57 को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट इसी महीने एचएएल को मिल सकती है. रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि भारत में इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का निर्माण आर्थिक और तकनीकी रूप से कितना व्यावहारिक होगा.

भारत में सुखोई-57 बनाने में कितना खर्च आएगा?

इस प्रस्तावित रिपोर्ट में रूस की ओर से यह आकलन दिया जाएगा कि अगर सुखोई-57 प्रोजेक्ट को भारत में शुरू किया जाता है, तो उस पर कितना खर्च आएगा. यहां यह समझना जरूरी है कि भारत पहले से ही सुखोई श्रेणी के फाइटर जेट्स का निर्माण करता रहा है.

साल 2000 में रूस के साथ हुए एक बड़े रक्षा समझौते के तहत भारत में 250 से अधिक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट्स बनाए जा चुके हैं. ये विमान चौथी पीढ़ी के बेहद शक्तिशाली फाइटर जेट्स माने जाते हैं. इनके निर्माण के लिए जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया था, वह आज भी काफी हद तक मौजूद है.

भारत के पास पहले से मौजूद सुविधाएं

हाल ही में रूस की एक टीम भारत दौरे पर आई थी, जिसने सुखोई-57 के संभावित निर्माण को लेकर मौजूदा सुविधाओं का आकलन किया. उस टीम का कहना था कि भारत में इस फाइटर जेट के निर्माण के लिए करीब 50 प्रतिशत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है.

रूसी टीम ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस प्रोजेक्ट की लागत और तकनीकी जरूरतों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी. एचएएल अब उसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके.

एचएएल की मौजूदा उत्पादन क्षमता

वर्तमान में एचएएल के पास सुखोई विमानों के निर्माण से जुड़ा मजबूत ढांचा मौजूद है:

  • नासिक डिवीजन में सुखोई-30 एमकेआई की फाइनल असेंबली लाइन
  • कोरापुट डिवीजन में AL-31FP टर्बोफैन इंजन का लाइसेंस प्रोडक्शन
  • केरल स्थित इकाइयों में एवियोनिक्स और अन्य कंपोनेंट्स का निर्माण

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्षमता और लागत का यह पूरा अध्ययन एचएएल की पहल पर किया जा रहा है, ताकि भारत के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुना जा सके.

भारत को क्यों चाहिए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट?

फिलहाल भारत सरकार ने यह तय नहीं किया है कि वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की जरूरत को किस विमान से पूरा किया जाएगा. अभी भारत 4.5 पीढ़ी के फ्रांसीसी राफेल जेट्स की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

जहां तक पांचवीं पीढ़ी के विमानों की बात है, तो इस समय भारत के पास व्यावहारिक रूप से केवल दो विकल्प मौजूद हैं:

  • अमेरिकी F-35
  • रूसी सुखोई-57

चीन के पास भी पांचवीं पीढ़ी का J-20 फाइटर जेट है, लेकिन रणनीतिक कारणों से भारत के लिए वह विकल्प संभव नहीं है. इसके अलावा दुनिया के किसी अन्य देश के पास फिलहाल ऐसा ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है, जिसे भारत खरीद सके.

स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट, लेकिन लगेगा समय

भारत खुद भी अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट विकसित कर रहा है, जिसे AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कहा जाता है. हालांकि यह परियोजना अभी विकास के चरण में है और इसे पूरी तरह तैयार होने में समय लगेगा.

अनुमान है कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 2035 के आसपास ही भारतीय वायुसेना को स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट मिल पाएगा. तब तक वायुसेना को अंतरिम समाधान की जरूरत होगी.

भारत को चाहिए 1000 से ज्यादा फाइटर जेट्स

इस समय भारतीय वायुसेना के पास करीब 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रन की है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की बढ़ती सैन्य ताकत और टू-फ्रंट वॉर की आशंका को देखते हुए यह संख्या भी पर्याप्त नहीं है.

कई विशेषज्ञ वायुसेना की क्षमता को बढ़ाकर 60 स्क्वाड्रन तक ले जाने की जरूरत बता रहे हैं. इसका मतलब है कि भारत को आने वाले वर्षों में करीब 1000 से 1100 फाइटर जेट्स की आवश्यकता होगी.

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