लाखों लोगों की जान बचा चुके NDRF के जवान, भारत ही नहीं दुनियाभर में करते हैं ऑपरेशन, क्या है इनका काम?

भारत में प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और चक्रवात अक्सर लोगों की जिंदगी को संकट में डाल देती हैं. इन विकट परिस्थितियों में जान-माल की सुरक्षा और त्वरित राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने एक प्रमुख भूमिका निभाई है.

NDRF Raising Day soldiers have saved the lives of lakhs of people
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NDRF: भारत में प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और चक्रवात अक्सर लोगों की जिंदगी को संकट में डाल देती हैं. इन विकट परिस्थितियों में जान-माल की सुरक्षा और त्वरित राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने एक प्रमुख भूमिका निभाई है. 

एनडीआरएफ ने पिछले 20 वर्षों में लाखों लोगों की जान बचाई है और अपनी बहादुरी और समर्पण से न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी प्रशंसा अर्जित की है. एनडीआरएफ का 19 जनवरी को स्थापना दिवस मनाया जाता है, और इस अवसर पर यह बल अपने अद्वितीय कार्यों और उपलब्धियों को साझा करता है.

पीएम मोदी ने की जवानों की सराहना

एनडीआरएफ का 21वां स्थापना दिवस इस वर्ष 2023 में मनाया गया, और इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीआरएफ के जवानों की बहादुरी और समर्पण की सराहना की. उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के जवान संकट के समय सबसे आगे रहते हैं, लोगों की जान बचाते हैं, राहत प्रदान करते हैं और इस कठिन घड़ी में आशा की किरण दिखाते हैं. पीएम मोदी ने अपनी भावुक संदेश में बल के कार्यों को सराहा और जवानों के अदम्य साहस को सलाम किया.

भारतीय सेना ने भी दी बधाई

प्रधानमंत्री के संदेश के अलावा, भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक जन सूचना (एडीजीपीआई) ने भी एनडीआरएफ को स्थापना दिवस की बधाई दी. उन्होंने लिखा, "आपदा सेवा सदैव सर्वत्र. जनरल उपेंद्र द्विवेदी और भारतीय सेना के सभी रैंक, एनडीआरएफ के सभी जवानों और उनके परिवारों को 21वें स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं." यह संदेश इस बल की सफलता और राष्ट्रीय महत्व को और अधिक प्रमाणित करता है.

एनडीआरएफ की स्थापना और संरचना

एनडीआरएफ की स्थापना भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2006 के तहत की थी. यह बल मुख्य रूप से गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका उद्देश्य आपदाओं के समय त्वरित राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देना है. बल की संरचना में कुल 16 बटालियन हैं, और प्रत्येक बटालियन में लगभग 1200 जवान तैनात होते हैं. इन बटालियनों का विभाजन पूरे देश के विभिन्न हिस्सों में किया गया है, ताकि आपातकालीन स्थिति में प्रत्येक स्थान पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके. वर्तमान में एनडीआरएफ की कमान IPS अधिकारी पीयूष आनंद के पास है, जो इसके महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं.

एनडीआरएफ का कार्यक्षेत्र

एनडीआरएफ का प्रमुख कार्य प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, चक्रवात, और भवनों का गिरना आदि के दौरान त्वरित राहत और बचाव कार्य करना है. इसके अतिरिक्त, एनडीआरएफ स्वच्छ भारत अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, और कुपोषण के खिलाफ जागरूकता जैसे सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है. इसके जवानों का प्रशिक्षण अत्यधिक कठोर होता है, जिससे वे आपातकालीन स्थितियों में अत्यधिक कुशलता से कार्य करते हैं.

एनडीआरएफ की उपलब्धियाँ

एनडीआरएफ ने अपने गठन के बाद से न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी कई महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दिया है. इस बल ने पिछले 20 वर्षों में 1,59,293 से अधिक लोगों की जान बचाई है और 8,64,316 से अधिक फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला है. इन आंकड़ों से साफ़ होता है कि एनडीआरएफ ने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सराहनीय भूमिका निभाई है.

विदेशों में एनडीआरएफ के मिशन

एनडीआरएफ ने भारत से बाहर भी कई देशों में अपने आपदा राहत कार्यों से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है.

  • 2011 में जापान में आए सुनामी और भूकंप के दौरान, एनडीआरएफ की टीम ने त्वरित प्रतिक्रिया दिखाते हुए कई लोगों की जान बचाई और राहत कार्यों को तेजी से अंजाम दिया.
  • 2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद, एनडीआरएफ की टीम ने तेजी से राहत कार्य शुरू किया और हजारों लोगों की जान बचाई.
  • 2023 में तुर्की में आए भूकंप के दौरान भी एनडीआरएफ ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया और कई महत्वपूर्ण राहत कार्यों में भाग लिया.
  • इसके अलावा, 2025 में म्यांमार में हुए भूकंप के दौरान भी एनडीआरएफ ने अपनी तत्परता और विशेषज्ञता का लोहा मनवाया.

इन सभी मिशनों में एनडीआरएफ की त्वरित, सक्षम और तकनीकी दृष्टि ने वैश्विक स्तर पर प्रशंसा बटोरी है.

भारत में एनडीआरएफ के प्रमुख ऑपरेशन

भारत में भी एनडीआरएफ ने कई बड़े राहत और बचाव कार्य किए हैं. इनमें से कुछ प्रमुख ऑपरेशनों की जानकारी इस प्रकार है:

सिल्क्यारा टनल ऑपरेशन (नवंबर 2023): इस ऑपरेशन में एनडीआरएफ ने पहाड़ों में फंसे हुए कई लोगों को सुरक्षित निकाला.

केरल बाढ़ (2018): भारी बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग फंस गए थे, जिनकी जान बचाने के लिए एनडीआरएफ ने कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बचाव कार्य चलाए.

चेन्नई बाढ़ (2015): भारी बारिश और बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम ने कई दिन लगातार राहत कार्य किए.

उत्तराखंड बाढ़/भूस्खलन (2013): ऑपरेशन सूर्या होप: इस ऑपरेशन के दौरान एनडीआरएफ ने पहाड़ों में भूस्खलन के कारण फंसे हुए लोगों को निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया.

एनडीआरएफ की भूमिका और भविष्य

एनडीआरएफ ने अब तक जितनी भी राहत और बचाव कार्यों को अंजाम दिया है, वे केवल इस बल के समर्पण और कठिनाईयों से लड़ने की क्षमता को दर्शाते हैं. भारत में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और उनके प्रभाव को देखते हुए, एनडीआरएफ का कार्य और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

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