नई दिल्ली में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ हुई द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर भारत का स्पष्ट और कड़ा रुख सामने रखा. अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपनाना आज की वैश्विक जरूरत है और पड़ोस में पनप रहे आतंकवाद के ढांचे को किसी भी तरह का समर्थन या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.
विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से “खाद-पानी” देते हैं, वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं. उन्होंने संकेतों में पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे ढांचों को नजरअंदाज करना या उन्हें बढ़ावा देना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकता.
आतंकवाद पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं
डॉ. जयशंकर ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत ने यूक्रेन संघर्ष समेत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हमेशा अपना दृष्टिकोण खुले और स्पष्ट रूप से रखा है. लेकिन इसके बावजूद भारत को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जाना अनुचित और अन्यायपूर्ण है.
उन्होंने कहा, “भारत को सेलेक्टिव तरीके से टारगेट करना पूरी तरह बेबुनियाद है. मैं आज एक बार फिर इसे दोहराता हूं- भारत अपने हितों के खिलाफ किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को स्वीकार नहीं करेगा.”
Opening remarks during meeting with DPM & FM @sikorskiradek of Poland.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 19, 2026
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जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे आतंकवाद का मुद्दा हो या वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले, भारत के साथ अलग व्यवहार करना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक.
पोलैंड ने भारत के रुख का किया समर्थन
डॉ. एस. जयशंकर की बातों पर पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने खुलकर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद से निपटने की जरूरत पर वह भारत के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं.
सिकोरस्की ने कहा, “मुझे जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल में शामिल होकर बेहद खुशी हुई. यह एक शानदार वैश्विक सांस्कृतिक मंच है. सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता पर मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूं. पोलैंड खुद भी आगजनी और आतंकवाद जैसी घटनाओं का शिकार रहा है.”
उनके इस बयान को भारत-पोलैंड के बीच सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर बढ़ती समझ के रूप में देखा जा रहा है.
टैरिफ और चुनिंदा निशाने पर भी साझा चिंता
बातचीत के दौरान टैरिफ और वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. पोलैंड के उपप्रधानमंत्री ने कहा कि चुनिंदा देशों को टैरिफ के जरिए निशाना बनाया जाना भी एक तरह की नाइंसाफी है.
उन्होंने कहा, “टैरिफ के माध्यम से सेलेक्टिव टारगेटिंग पर आपकी चिंता से मैं पूरी तरह सहमत हूं. हमें डर है कि इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और उथल-पुथल बढ़ सकती है.”
सिकोरस्की ने यह भी उम्मीद जताई कि भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को और मजबूत बनाए रखेगा. उन्होंने कहा कि भारत द्वारा यूरोप के विभिन्न देशों में दूतावास स्थापित करना यह दिखाता है कि भारत यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है.
सेलेक्टिव टारगेटिंग सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं
पोलैंड के विदेश मंत्री की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जाना केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है.
उन्होंने कहा, “बेशक, सेलेक्टिव टारगेटिंग सिर्फ टैरिफ का मामला नहीं है. इसके और भी कई तरीके रहे हैं. इन सभी मुद्दों पर हम आगे विस्तार से चर्चा करेंगे.”
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