इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से एक बार फिर गंभीर सुरक्षा चुनौती की खबर सामने आई है. लक्की मरवत जिले के मंजीवाला इलाके के पास अज्ञात हमलावरों ने एक प्रमुख गैस पाइपलाइन को निशाना बनाते हुए विस्फोट कर दिया. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, विस्फोटकों का इस्तेमाल कर पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे गैस सप्लाई और संबंधित बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है.
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि धमाका देर रात किया गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. विस्फोट के बाद गैस पाइपलाइन में आग लगने और गैस रिसाव की स्थिति भी बनी, जिसके चलते आसपास के क्षेत्रों में एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी गई. हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है.
स्थानीय पुलिस ने विस्फोट की पुष्टि की
अब तक पाकिस्तान सरकार या संबंधित गैस प्राधिकरण की ओर से इस हमले को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन स्थानीय पत्रकारों और क्षेत्रीय मीडिया के मुताबिक, पुलिस ने पाइपलाइन पर हुए विस्फोट की पुष्टि की है. सुरक्षाबलों ने मौके पर पहुंचकर इलाके को घेर लिया और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है.
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पाइपलाइन को जानबूझकर निशाना बनाया गया और इसके लिए विस्फोटक सामग्री का प्रयोग किया गया. सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि हमला किस संगठन ने किया और इसका उद्देश्य क्या था. घटना के बाद आसपास के गांवों में सुरक्षा चौकसी बढ़ा दी गई है और संदिग्धों की तलाश के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से उग्रवाद की चपेट में
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का वह इलाका माना जाता है, जहां वर्षों से चरमपंथी गतिविधियां होती रही हैं. यह क्षेत्र तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे उग्रवादी संगठनों का प्रभाव क्षेत्र रहा है. पिछले कुछ वर्षों में यहां सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच झड़पों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. गैस पाइपलाइन जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी पर भी सीधा असर डालता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना आतंकवादी संगठनों की रणनीति का हिस्सा होता है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके और अस्थिरता का माहौल पैदा किया जा सके.
चेक पोस्ट पर हमला, तीन जवानों की मौत
गैस पाइपलाइन धमाके से पहले इसी प्रांत के खैबल जिले में सुरक्षा बलों पर एक और बड़ा हमला किया गया. रिपोर्टों के मुताबिक, टीटीपी से जुड़े चरमपंथियों ने एक सुरक्षा चेक पोस्ट को निशाना बनाया. इस हमले में पाकिस्तानी सेना के एक कैप्टन समेत तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई. मारे गए अधिकारी की पहचान कैप्टन अब्बास शिनवारी के रूप में की गई है.
हमले की प्रकृति को देखते हुए इसे बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने पहले विस्फोटकों से लैस ड्रोन के जरिए चेक पोस्ट पर हमला किया और इसके बाद भारी गोलीबारी शुरू कर दी. इस दौरान चार सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
करीब 40 मिनट तक चली मुठभेड़
सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच लगभग 40 मिनट तक भीषण गोलीबारी होती रही. मुठभेड़ के बाद अतिरिक्त सुरक्षाबलों को मौके पर भेजा गया और पूरे इलाके को सील कर दिया गया. सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया है, ताकि हमलावरों को पकड़ने या उनके नेटवर्क तक पहुंचा जा सके.
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि उग्रवादी संगठन अब तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और जटिल होती जा रही हैं.
पाकिस्तान में बढ़ती चरमपंथी हिंसा
पाकिस्तान में हाल के महीनों में चरमपंथी हिंसा में तेज बढ़ोतरी देखी गई है. केवल खैबर पख्तूनख्वा ही नहीं, बल्कि बलूचिस्तान जैसे अशांत प्रांत भी हिंसक घटनाओं से जूझ रहे हैं. बीते सप्ताह बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बड़ा हमला किया था. इस हमले को लेकर BLA ने बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया था.
पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से बाद में इस हमले में 17 सुरक्षाकर्मियों समेत करीब 50 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी. साथ ही यह भी बताया गया कि जवाबी कार्रवाई में बड़ी संख्या में चरमपंथी मारे गए हैं. इन घटनाओं ने एक बार फिर पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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