भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कब होगा साइन, किसे कितना मिलेगा फायदा? पीयूष गोयल ने लोकसभा में दिया जवाब

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं के बाद आखिरकार ट्रेड डील को लेकर सहमति बन चुकी है.

India-America trade deal who will benefit Piyush Goyal in Lok Sabha
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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं के बाद आखिरकार ट्रेड डील को लेकर सहमति बन चुकी है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कब होंगे और दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) किस तारीख तक जारी किया जाएगा. इस संबंध में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को अहम जानकारी साझा की है.

पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और अमेरिका अगले चार से पांच दिनों के भीतर इस ट्रेड डील पर एक संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि औपचारिक समझौते का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है और उम्मीद है कि मार्च के मध्य तक दोनों देश इस पर हस्ताक्षर कर देंगे. फिलहाल तकनीकी और कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि समझौता पूरी तरह संतुलित और दोनों देशों के हितों के अनुकूल हो.

पीएम मोदी की यात्रा के बाद तेज हुई बातचीत

वाणिज्य मंत्री ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद से और तेज हो गई थी. 2 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों ने ट्रेड डील को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.

इसी बातचीत के बाद अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती की घोषणा की. पहले जहां भारतीय सामान पर कुल मिलाकर करीब 50 प्रतिशत शुल्क (25 प्रतिशत बेसिक और 25 प्रतिशत अतिरिक्त) लगाया जा रहा था, वहीं अब इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर मौजूद कुछ व्यापारिक बाधाओं को कम करने का संकेत दिया है.

एक साल से चल रही थी बातचीत- पीयूष गोयल

लोकसभा में उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच यह बातचीत अचानक नहीं हुई, बल्कि पिछले करीब एक साल से दोनों देशों के अधिकारी विभिन्न स्तरों पर लगातार संपर्क में थे. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया.

गोयल के मुताबिक, “लगभग एक साल की चर्चा के बाद दोनों देश इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है. बातचीत का मकसद सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि किसी भी संवेदनशील सेक्टर को नुकसान न पहुंचे.”

कृषि और डेयरी सेक्टर रहेंगे सुरक्षित

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने इस समझौते में अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों से जुड़े किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत की गई है.

गोयल ने यह भी बताया कि कुछ ऐसे सेक्टर थे जिन्हें अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानता है, जबकि भारत की ओर से कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों को संरक्षित रखना प्राथमिकता रही. लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने पर सहमति बनी है.

टैरिफ कटौती और तेल आयात को लेकर चर्चाएं

ट्रेड डील के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाने का फैसला अहम माना जा रहा है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि इस समझौते में भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका तथा संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं. हालांकि भारत सरकार की ओर से इस विषय पर अभी तक आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है.

‘मेड इन इंडिया’ को मिलेगा फायदा- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत के बाद यह जानकर खुशी हुई कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. उन्होंने इसे भारत के लिए सकारात्मक कदम बताते हुए अमेरिकी नेतृत्व का आभार जताया था.

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक बाधाएं कम होने से देश में कई आयातित उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पाद जैसे लैपटॉप, मोबाइल गैजेट्स और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं क्योंकि इनके आयात पर खर्च कम होगा.

इसके अलावा, प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड सामान और कुछ घरेलू उपकरणों की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिल सकती है. कृषि क्षेत्र में दालें, डेयरी उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसी वस्तुओं पर आयात शुल्क कम होने से खाद्य महंगाई के दबाव को कुछ हद तक राहत मिल सकती है. हालांकि, इन सभी लाभों की वास्तविक तस्वीर समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक होने के बाद ही साफ हो पाएगी.

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