भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद ऊर्जा नीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करेगा और क्या अमेरिका के आग्रह पर वेनेजुएला से तेल आयात को प्राथमिकता देगा. इन अटकलों के बीच भारत सरकार ने 5 फरवरी 2026 को अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है.
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत किसी भी तरह के बाहरी दबाव में आकर अपने ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले नहीं करेगा. सरकार की प्राथमिकता केवल और केवल देश के 140 करोड़ लोगों के हितों की रक्षा करना है. ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत भविष्य में भी वही कदम उठाएगा जो देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होंगे.
ऊर्जा आयात में विविधता बनी रहेगी
सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ही देश पर निर्भर नहीं रहेगा. कच्चे तेल के आयात को अलग-अलग स्रोतों से किया जाएगा ताकि सप्लाई में किसी तरह का जोखिम न बने. विदेश मंत्रालय के अनुसार, बदलते वैश्विक हालात, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को देखते हुए आयात का विविधीकरण भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है.
मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि अमेरिका की ओर से वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है. इन अटकलों के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि वह व्यावसायिक दृष्टिकोण से हर संभावित विकल्प को देखने के लिए तैयार है, लेकिन अंतिम फैसला देशहित और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा.
वेनेजुएला: पुराना ऊर्जा साझेदार
विदेश मंत्रालय की नियमित ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि वेनेजुएला लंबे समय से भारत का ऊर्जा क्षेत्र में अहम भागीदार रहा है. व्यापार और निवेश दोनों स्तरों पर दोनों देशों के बीच सहयोग रहा है. वर्ष 2008 से भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला (PdVSA) के साथ मिलकर वहां काम कर रही हैं.
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2019-20 तक भारत वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात करता रहा, लेकिन बाद में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह आपूर्ति रुक गई. इसके बाद 2023-24 में कुछ समय के लिए आयात दोबारा शुरू हुआ, लेकिन प्रतिबंध फिर से लागू होने के कारण इसे एक बार फिर रोकना पड़ा. सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत भविष्य में भी वेनेजुएला सहित किसी भी नए आपूर्ति विकल्प के व्यावसायिक पहलुओं को परखने के लिए तैयार है.
वैश्विक हालात में भारत की रणनीति
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद अस्थिर है. कई क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंधों की नीति और सप्लाई चेन में रुकावटें लगातार बनी हुई हैं. ऐसे माहौल में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह स्थिर, किफायती और भरोसेमंद स्रोतों की तलाश लगातार करता रहे.
भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि आयात लागत कम रहे, सप्लाई बनी रहे और आम उपभोक्ताओं पर ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ न पड़े. इसी रणनीति के तहत सरकार नए विकल्पों को तलाशने और पुराने साझेदारों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने पर जोर दे रही है.
140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता
रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग के दौरान दोहराया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना है. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और बाजार परिस्थितियों के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की मूल रणनीति है. सरकार के सभी फैसले इसी उद्देश्य से जुड़े हुए हैं और आगे भी इसी सोच के साथ नीतियां तय की जाएंगी.
इस दौरान विदेश मंत्रालय ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें किसी कथित बैठक या दौरे का उल्लेख किया गया था. मंत्रालय ने कहा कि ऐसी किसी बैठक या यात्रा का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है.
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