फॉक्सकॉन ने दूसरी बार भारत से चीनी इंजीनियर्स वापस बुलाए, क्या फिर बिगड़ रहे दोनों देशों के रिश्ते?

भारत में मैन्युफैक्चरिंग को लेकर एक बड़ी हलचल हुई है. फॉक्सकॉन की सब्सिडियरी 'युझान टेक्नोलॉजी' ने तमिलनाडु में चल रहे अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट से 300 चीनी इंजीनियरों को अचानक वापस चीन बुला लिया है.

Foxconn calls back Chinese engineers from India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

भारत में मैन्युफैक्चरिंग को लेकर एक बड़ी हलचल हुई है. फॉक्सकॉन की सब्सिडियरी 'युझान टेक्नोलॉजी' ने तमिलनाडु में चल रहे अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट से 300 चीनी इंजीनियरों को अचानक वापस चीन बुला लिया है. ये इंजीनियर भारत में डिस्प्ले मॉड्यूल फैक्ट्री की स्थापना और प्रोडक्शन लाइन के लिए टेक्निकल सपोर्ट दे रहे थे. इस फैसले ने फॉक्सकॉन के भारत में चल रहे निवेश और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

यह पहली बार नहीं है कि ऐसा हुआ है. बीते दो महीने में यह दूसरी बार है जब चीन ने भारत में काम कर रहे फॉक्सकॉन इंजीनियरों को अचानक वापस बुलाया है. इससे पहले जुलाई 2025 में भी 300 से अधिक चीनी टेक्नीशियनों को चीन बुला लिया गया था, जिससे iPhone 17 के प्रोडक्शन में बाधा आई थी.

चीन के दबाव में फॉक्सकॉन का फैसला?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सकॉन को यह कदम तब उठाना पड़ा जब चीनी सरकार ने कंपनी के चेयरमैन से भारत में हो रहे निवेश की विस्तृत रिपोर्ट मांगी. इसके बाद कंपनी ने भारतीय अधिकारियों को सूचित किया कि चीनी प्रवासी इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से वापस चीन भेजा जा रहा है.

यह फैसला उस समय आया है जब भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार की खबरें सुर्खियों में हैं. लेकिन इस घटनाक्रम ने यह दिखा दिया है कि चीन अब भी अपनी कंपनियों के विदेशी निवेश को लेकर सतर्क और नियंत्रित भूमिका निभा रहा है.

भारत में फॉक्सकॉन का बड़ा निवेश

फॉक्सकॉन, जो कि एपल का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है, भारत में ₹13,180 करोड़ के निवेश के साथ तमिलनाडु में एक नई डिस्प्ले मॉड्यूल यूनिट स्थापित कर रही है. यह यूनिट कंपनी के ग्लोबल सप्लाई चेन को चीन से हटाकर भारत और अन्य देशों में शिफ्ट करने की रणनीति का हिस्सा है.

तमिलनाडु की यह यूनिट न सिर्फ भारत में iPhone मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करेगी, बल्कि यह हजारों भारतीयों को रोजगार भी देगी. यही वजह है कि भारत सरकार ने चीनी इंजीनियरों के लिए विशेष वीज़ा सुविधा भी उपलब्ध करवाई थी ताकि फैक्ट्री सेटअप और ट्रेनोंग में कोई देरी न हो.

भारत में iPhone का उत्पादन नई ऊंचाइयों पर

हाल ही में जारी रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में iPhone निर्माण के आंकड़े लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं. 2025 के पहले छह महीनों में भारत में 2.39 करोड़ iPhone बनाए गए, जो कि पिछले साल की तुलना में 53% अधिक है.

इतना ही नहीं, भारत से iPhone का निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है. रिसर्च फर्म CyberMedia के मुताबिक, जनवरी से जून 2025 के बीच भारत से 2.28 करोड़ iPhone निर्यात किए गए, जो एक साल पहले की तुलना में 52% की सालाना वृद्धि है.

अमेरिकी बाजार में भारत की बादशाहत

भारत अब अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात के मामले में चीन को पीछे छोड़ चुका है. रिसर्च फर्म Canalys की रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल-जून 2025 तिमाही में अमेरिका में इंपोर्ट हुए स्मार्टफोन्स में 44% मेड इन इंडिया थे, जबकि चीन का हिस्सा घटकर 25% रह गया है.

पिछले साल की समान तिमाही में यह अनुपात बिल्कुल उल्टा था भारत का हिस्सा केवल 13% और चीन का 61% था. यह बदलाव साफ दर्शाता है कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए भारत अब एक विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता बन गया है.

चीन से हटती मैन्युफैक्चरिंग, भारत की ओर बढ़ता रुझान

कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर कंपनियों ने यह महसूस किया कि मैन्युफैक्चरिंग को केवल चीन पर निर्भर रखना जोखिम भरा हो सकता है. चीन में लॉकडाउन, जीरो-कोविड नीति और अमेरिका-चीन टैरिफ वॉर के चलते कंपनियों ने "चाइना प्लस वन" स्ट्रैटेजी अपनाई, और भारत इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा.

भारत ने इस मौके को दोनों हाथों से थामा. केंद्र सरकार ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के माध्यम से विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया. Apple, Samsung और Foxconn जैसी कंपनियों ने भारत में अपने प्लांट्स बढ़ाने शुरू कर दिए.

फॉक्सकॉन की स्थिति और भारत के लिए मायने

हालांकि फॉक्सकॉन के लिए चीन एक बड़ा घरेलू बाजार और रणनीतिक साझेदार है, लेकिन भारत की बढ़ती क्षमता और राजनीतिक स्थिरता उसे लगातार आकर्षित कर रही है.

चीन द्वारा इंजीनियरों को वापस बुलाने का फैसला चाहे किसी रणनीतिक उद्देश्य से लिया गया हो, लेकिन भारत में कंपनी की दीर्घकालिक योजनाएं अभी भी स्थिर नजर आ रही हैं. कंपनी के प्रोजेक्ट्स को जारी रखने के लिए अन्य देशों से तकनीकी विशेषज्ञ बुलाए जा रहे हैं, ताकि प्रोडक्शन और सेटअप में देरी न हो.

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