Israel Gaza War: गाजा पट्टी में जारी संघर्ष एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. हाल ही में दक्षिणी गाजा में इजरायली सेना और फलस्तीनी लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष में चार इजरायली सैनिकों की मौत हो गई, जबकि जवाबी कार्रवाई में 85 फलस्तीनी मारे गए हैं. इनमें हमास के लड़ाके भी शामिल हैं. इजरायली सेना अब गाजा सिटी के भीतर गहराई तक प्रवेश कर चुकी है और भारी टैंक एवं वायुसेना के सहयोग से अभियान को तेज कर रही है.
इस सैन्य अभियान के चलते गाजा सिटी की संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है. इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बाधित कर दी गई हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों का संपर्क दुनिया से कट गया है. बड़ी संख्या में लोग पहले ही शहर छोड़ चुके हैं, लेकिन अब भी लाखों नागरिक विस्थापन और जान के खतरे के बीच फंसे हुए हैं.
बंधकों की रिहाई को लेकर बढ़ा दबाव
इजरायली सेना का कहना है कि वह हमास पर दबाव बनाकर बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करना चाहती है. फिलहाल हमास के पास 48 बंधक बताए जा रहे हैं, जिनमें से लगभग 20 के जीवित होने की संभावना है. बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए इजरायल में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि सैन्य कार्रवाई के चलते इनकी जान को गंभीर खतरा बताया जा रहा है.
वेस्ट बैंक और लेबनान में भी तनाव
इधर वेस्ट बैंक में एलेनबी क्रॉसिंग पर एक आतंकी हमले में दो इजरायली सैनिक मारे गए. यह हमला एक ट्रक ड्राइवर ने अंजाम दिया, जो राहत सामग्री लेकर आ रहा था. उसके पास से हथियार बरामद हुए और वह घटनास्थल पर ही मारा गया. इसी दिन इजरायली वायुसेना ने लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर भी हवाई हमले किए.
इजरायली सरकार और सेना के बीच मतभेद
गाजा में सैन्य कार्रवाई को लेकर इजरायल की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री नेतन्याहू के फैसलों से सेना के वरिष्ठ अधिकारी असहमति जता रहे हैं. खासकर गाजा सिटी में जमीन पर स्थायी कब्जे और कतर में की गई हवाई कार्रवाई को लेकर सेना ने आपत्ति जताई थी.
राजनीतिक निर्णयों के कारण इजरायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना का शिकार हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आमसभा में इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुए हैं. वहीं कई यूरोपीय देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता देना शुरू कर दिया है और इजरायली उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो गई है.
नए अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू असंतोष के बीच इजरायल
यरुशलम स्थित इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के प्रमुख योनाथन प्लेजनर के अनुसार, इजरायल इस समय एक जटिल और अप्रत्याशित दौर से गुजर रहा है. सभी प्रमुख निर्णयों का नियंत्रण प्रधानमंत्री के हाथों में केंद्रित होने से असंतुलन पैदा हो रहा है. इससे सरकार की लोकप्रियता में गिरावट आई है और बंधकों की रिहाई को लेकर भी उसकी आलोचना हो रही है.
सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक अनिर्णय के इस दौर में सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक चुका रहे हैं — चाहे वे गाजा सिटी में फंसे फलस्तीनी हों या इजरायली बंधक, जिनकी सुरक्षा अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है.
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