US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री संघर्ष ने एक नई ऊंचाई पकड़ ली है. अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की तरफ आने-जान वाले जहाजों की नाकाबंदी शुरू कर दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी है कि उनकी नौसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा.
"158 जहाजों को बनाया निशाना"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को धमकी दी. उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना समुद्र की तलहटी में पड़ी है, पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. हमने उनके एक या दो नहीं, 158 जहाजों को निशाना बनाया. हमने अभी तक उनके ‘फास्ट अटैक शिप्स’ को निशाना नहीं बनाया है. अगर इनमें से कोई भी जहाज हमारी नाकाबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत तबाह कर दिया जाएगा. यह त्वरित और क्रूर कार्रवाई होगी.
ईरान का जवाब
ईरान ने भी इस नाकाबंदी पर कड़ा जवाब देने की धमकी दी है. ईरान के अधिकारियों ने कहा कि यदि उनके जहाजों को रोका गया, तो वह खाड़ी में स्थित पड़ोसी देशों के बंदरगाहों को निशाना बनाएंगे. यह एक स्पष्ट संकेत है कि ईरान अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर है और वह इस संघर्ष को और बढ़ाने का इरादा रखता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की भूमिका और नाकाबंदी के नियम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि इस नाकाबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल ब्रिकी को रोकना है. CENTCOM ने स्पष्ट किया कि ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में दाखिल होने वाले सभी देशों के जहाजों को रोका जाएगा, लेकिन अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगेगी. यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने अपने सैनिकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं, ताकि इस नाकाबंदी के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो.
ईरान के छोटे जहाज
अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की नौसेना को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पास छोटे और तेज हमलावर जहाजों का एक अलग बेड़ा है. ये छोटे जहाज खास तौर पर संकरे समुद्री रास्तों जैसे होर्मुज स्ट्रेट में लड़ाई के लिए बनाए गए हैं. इन जहाजों की विशेषता यह है कि ये बेहद तेज होते हैं और आसानी से हमला करने, मिसाइल दागने, समुद्र में माइंस बिछाने और व्यापारिक जहाजों को परेशान करने में सक्षम हैं.
ब्रिटेन और फ्रांस की निष्क्रियता
नाटो के सदस्य देशों, विशेषकर ब्रिटेन और फ्रांस, ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका और ईरान के इस संघर्ष में नाकाबंदी का हिस्सा नहीं बनेंगे. इन देशों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है, क्योंकि यह समुद्री रास्ता दुनिया के करीब 20% तेल के परिवहन का मुख्य मार्ग है. इन देशों का मानना है कि संघर्ष को बढ़ाने के बजाय इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पुनः खुला रखना चाहिए, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति में कोई विघ्न न आए.
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट एक अत्यंत संकरे जलमार्ग के रूप में जाना जाता है, जिसकी चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में मात्र 20 मील है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में छोटे और तेज जहाजों को बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान के छोटे जहाज इस संकरे रास्ते में आसानी से छिप सकते हैं और इन्हें नष्ट करना अत्यंत कठिन है. यह युद्ध के लिए एक अत्यंत लाभकारी रणनीति बन जाती है, जिसे ईरान ने 1988 के टैंकर वॉर के बाद से अपनाया है.
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