भारत-पाकिस्तान के बीच चीनी चाल! रूस के S-400 पर नजर; शहबाज को मिल सकती है 'सीक्रेट डिटेल'

भारत ने अपनी वायु सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है.

Chinese ploy between India and Pakistan Russia S400 Shehbaz
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

भारत ने अपनी वायु सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है. इस प्रणाली को भारत ने खासतौर पर चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरों को ध्यान में रखते हुए अपने सुरक्षा तंत्र में शामिल किया है. हालांकि अब इस शक्तिशाली हथियार को लेकर एक नई चिंता सामने आई है, जो सीधे भारत की रणनीतिक तैयारियों पर असर डाल सकती है.

S-400 की जानकारी साझा करने की आशंका

एक विदेशी सैन्य वेबसाइट BulgarianMilitary.com की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को यह आशंका है कि चीन और पाकिस्तान के बीच एक गोपनीय समझौते की बातचीत चल रही है. इस समझौते के तहत चीन, पाकिस्तान को रूसी S-400 सिस्टम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा कर सकता है. यह जानकारी युद्ध की स्थिति में भारत के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है.

यहां गौर करने वाली बात यह है कि चीन ने भी भारत से पहले 2014 में रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीदा था. इस कारण चीन के पास इस प्रणाली की तकनीकी समझ और ऑपरेशनल अनुभव मौजूद है. यदि चीन इस तकनीकी जानकारी को पाकिस्तान के साथ साझा करता है—जैसे कि रडार की फ्रीक्वेंसी, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, या रडार की सीमाएं—तो भारत की सुरक्षा रणनीति को गहरा झटका लग सकता है.

क्या है S-400 ट्रायम्फ सिस्टम की ताकत?

S-400 ट्रायम्फ को रूस की अल्माज-एंटी कंपनी ने विकसित किया है. यह एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जो हवाई हमलों से बचाव के लिए आधुनिकतम तकनीक से लैस है. यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और 380 किलोमीटर की दूरी तक हमले करने में सक्षम है.

इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह लड़ाकू विमानों, बमवर्षक विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन जैसे विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को पहचान कर उन्हें मार गिरा सकता है. इसमें विभिन्न रेंज की मिसाइलें मौजूद हैं, जैसे कि 40N6 मिसाइल जो लंबी दूरी तक मार कर सकती है.

भारत की रणनीतिक तैनाती और चुनौतियां

भारत ने 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर का समझौता कर S-400 सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन खरीदे थे. अब तक तीन स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं, जिन्हें चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के नजदीक तैनात किया गया है. शेष दो स्क्वाड्रन की आपूर्ति रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते प्रभावित हुई है, जिससे भारत की सुरक्षा तैयारियों में कुछ हद तक देरी हुई है.

अगर पाकिस्तान को इस सिस्टम की कमजोरियों की जानकारी मिल जाती है, तो भारत के लिए यह एक गंभीर सुरक्षा संकट बन सकता है. यह न केवल भारत की हवाई रक्षा को खतरे में डालेगा, बल्कि इस पर किए गए अरबों डॉलर के निवेश को भी अप्रभावी बना सकता है.

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