म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को एंट्री गेट पर सुरक्षा जांच के दौरान रोका गया. जानकारी के मुताबिक, उनसे भी बाकी प्रतिभागियों की तरह पहचान पत्र दिखाने को कहा गया.
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि कॉन्फ्रेंस स्थल पर तैनात एक महिला सुरक्षाकर्मी सभी लोगों के आईडी कार्ड चेक कर रही है. उसी दौरान असीम मुनीर अपने दो अधिकारियों के साथ अंदर जाने की कोशिश करते हैं. उनके साथ मौजूद अधिकारियों ने अपने आईडी कार्ड गले में पहन रखे थे, लेकिन मुनीर ने खुद आईडी कार्ड नहीं पहना था.
जब सुरक्षाकर्मी ने उनसे आईडी कार्ड दिखाने को कहा, तब उनके साथ मौजूद एक अधिकारी ने उनका कार्ड दिखाया. बताया जा रहा है कि वहां उन्हें किसी खास मेहमान की तरह नहीं, बल्कि सामान्य प्रतिनिधि की तरह ही जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.
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— HTN World (@htnworld) February 14, 2026
Field Marshal Army Chief Asim Munir arrives for Munich Security Conference in Germany pic.twitter.com/v4PQpW4z77
सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कुछ लोगों ने इसे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि से जोड़ा. आलोचकों का कहना है कि देश के भीतर बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले सैन्य प्रमुख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खास पहचान नहीं मिली.
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल राजा ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें बहुत कम लोग पहचानते हैं, इसलिए गेट पर औपचारिक जांच की गई. उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और बढ़ गई.
सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा?
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूनिख जैसे बड़े और संवेदनशील सम्मेलन में सुरक्षा नियम बहुत सख्त होते हैं. वहां सभी प्रतिभागियों को तय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों. ऐसे में आईडी कार्ड की जांच को सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया भी माना जा सकता है.
वीडियो में साफ दिखता है कि सुरक्षाकर्मी हर व्यक्ति का आईडी देख रही थी. इसी क्रम में असीम मुनीर से भी कार्ड दिखाने को कहा गया. इस घटना को कुछ लोग प्रोटोकॉल से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर नियम सबके लिए समान होते हैं.
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