S Jaishankar On Russian Oil: जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिका और भारत के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 14 फरवरी को कहा कि भारत ने वॉशिंगटन को भरोसा दिलाया है कि वह रूस से अतिरिक्त तेल नहीं खरीदेगा. उनके अनुसार, जो तेल सौदे पहले से प्रक्रिया में हैं, वे प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन आगे की खरीद पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कंपनियों सहित कई भारतीय कंपनियां अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी तेल की नई खरीद से फिलहाल बच रही हैं. रुबियो ने यह बात उस समय कही जब यूरोपीय देश यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं और रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं.
Joined FM @JoWadephul of Germany for a panel on ‘Navigating Uncertainty: India and Germany in a World in Disarray’
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 14, 2026
Discussed how India-Germany and India-EU ties were contributing to global security and derisking.
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भारत करेगा अपने हित में फैसला
उसी सम्मेलन के अगले सत्र में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि भारत अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर कायम है. इसका मतलब है कि भारत किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसले लेता है.
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ बातचीत में जयशंकर ने कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद लागत, जोखिम और उपलब्धता जैसे कारकों पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार जटिल है और भारतीय तेल कंपनियां वही फैसला लेंगी जो उन्हें देश के हित में सही लगेगा. जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत के पास ऐसे निर्णय लेने का विकल्प है जो पश्चिमी देशों की सोच से अलग हो सकते हैं.
टैरिफ और निगरानी का मुद्दा
अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में हटा दिया गया. साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने वाणिज्य सचिव को यह जिम्मेदारी दी है कि वे भारतीय तेल खरीद पर नजर रखें. अगर अमेरिका को लगता है कि भारत ने सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल का आयात फिर शुरू किया है, तो 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क दोबारा लगाया जा सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा खरीद का मुद्दा भारत और पश्चिमी देशों के संबंधों में अहम भूमिका निभा रहा है, और भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
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