'भारत कहां से तेल खरीदेगा, ये हम तय करेंगे...' भारत-अमेरि‍का ट्रेड डील पर जयशंकर का सीधा जवाब

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर सकता है.

India-US trade deal Jaishankar told from where India will buy oil
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका के दबाव में भारत को यह फैसला लेना पड़ सकता है. विपक्ष की ओर से भी सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा था.

इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी में आयोजित Munich Security Conference में ‘दिल्ली डिसाइड्स’ विषय पर चर्चा के दौरान साफ शब्दों में कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर किसी के दबाव में नहीं आएगा. उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत और राष्ट्रीय हित को देखते हुए तय करेगा कि तेल कहां से खरीदा जाए.

ट्रेड डील और टैरिफ पर क्या हुआ?

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में व्यापार समझौता हुआ, जिसमें अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस राहत के बदले अमेरिका चाहता था कि भारत Russia से तेल खरीदना कम या बंद करे और Venezuela जैसे अन्य स्रोतों से तेल खरीदे.

हालांकि जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल कंपनियां चाहे सरकारी हों या निजी बाजार की स्थिति और देश के हित को देखकर फैसला लेती हैं. भारत की पहली प्राथमिकता उसकी ऊर्जा सुरक्षा है.

जयशंकर का बयान अहम क्यों?

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ट्रेड डील के तुरंत बाद आया. आम तौर पर माना जाता है कि बड़े व्यापारिक समझौतों के बाद देश एक-दूसरे की शर्तों को मानते हैं. लेकिन जयशंकर ने साफ किया कि व्यापारिक संबंध अपनी जगह हैं और भारत की विदेश नीति अपनी जगह.

उन्होंने कहा कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ बनाए रखेगा.

‘रणनीतिक स्वायत्तता’ का मतलब क्या है?

रणनीतिक स्वायत्तता का मतलब है कि भारत अपने फैसले खुद लेगा. वह किसी एक बड़े देश या गुट के दबाव में नहीं आएगा. अगर रूस से तेल खरीदना देश के हित में होगा तो भारत वह कदम उठाएगा.

भारत किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने की नीति नहीं अपनाना चाहता.

रूस की ओर से भी शांत प्रतिक्रिया आई. रूस ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और वह अपनी जरूरत के अनुसार कहीं से भी तेल खरीद सकता है. इसे कूटनीतिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है.

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