8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में काफी उत्साह है. इसी उत्साह का फायदा अब साइबर ठग उठा रहे हैं. ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों ने “सैलरी कैलकुलेटर” के नाम पर नया जाल बिछाया है. इस खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल ‘साइबर दोस्त’ ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
क्या है सैलरी कैलकुलेटर स्कैम?
ठग लोगों को “8th CPC Salary Calculator” नाम की एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं होती, बल्कि APK फाइल के जरिए फोन में इंस्टॉल कराई जाती है. यानी इसे आधिकारिक ऐप स्टोर से नहीं, बल्कि सीधे लिंक के जरिए डाउनलोड कराया जाता है.
जैसे ही कोई व्यक्ति इस APK फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल करता है, ठगों को उसके फोन का पूरा एक्सेस मिल सकता है.
कैसे खाली हो जाता है बैंक खाता?
APK फाइल इंस्टॉल होने के बाद ठग दूर से ही फोन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं. वे मैसेज, ओटीपी और बैंक से जुड़ी जानकारी तक देख सकते हैं. इसके बाद वे बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं. कई मामलों में लोगों के खाते पूरी तरह खाली हो चुके हैं.
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे ऐप बैकग्राउंड में काम करते हैं और यूजर को पता भी नहीं चलता कि उसकी निजी जानकारी चोरी हो रही है.
क्या होता है APK और साइड लोडिंग?
आम तौर पर लोग गूगल प्ले स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करते हैं. लेकिन जब कोई ऐप सीधे लिंक या फाइल के जरिए इंस्टॉल की जाती है, तो इसे साइड लोडिंग कहा जाता है. ऐसे ऐप अक्सर सुरक्षित नहीं होते और इन्हें प्ले स्टोर पर मंजूरी नहीं मिलती.
ठग मैसेज या व्हाट्सएप के जरिए APK फाइल भेजते हैं और लालच देकर उसे इंस्टॉल करवाते हैं. 8वें वेतन आयोग के तहत नई सैलरी जानने का उत्साह ही इस ठगी का मुख्य हथियार है.
कैसे रहें सुरक्षित?
सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि भारत सरकार कभी भी व्हाट्सएप या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए APK फाइल नहीं भेजती. खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
अगर गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए तो तुरंत अनइंस्टॉल करें, फोन को फैक्ट्री रीसेट करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं.
थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है. 8वें वेतन आयोग की जानकारी के लिए सिर्फ भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें.
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