नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद सीमा से जुड़े जमीन विवादों को सुलझाने का काम तेजी से हो रहा है. उन्होंने रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, की सुरक्षा के लिए खास ‘त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड’ तैयार किए जाने की जानकारी दी.
अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी स्थित सशस्त्र सीमा बल के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने करीब 189 करोड़ रुपये की कई प्रशासनिक और आवासीय परियोजनाओं की आधारशिला रखी और कुछ परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया. कार्यक्रम में गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
क्यों अहम है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
गृह मंत्री ने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक है. यह क्षेत्र देश के आठ राज्यों को जोड़ता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
उन्होंने बताया कि धुबरी (असम), किशनगंज (बिहार) और चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) में तीन नए सैन्य ठिकानों के साथ एक त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है. इस इलाके की सुरक्षा और तैयारी को मजबूत रखने के लिए ‘तीस्ता प्रहार’ जैसी सैन्य कवायद भी की जा रही है.
शाह के मुताबिक, यह सुरक्षा ग्रिड इलाके में निगरानी, सैन्य मौजूदगी और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करेगा.
गृह मंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ का किया जिक्र
अमित शाह ने कहा कि 1965 में बनी सशस्त्र सीमा बल देश की अलग-अलग सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. वर्ष 2001 से यह भारत-नेपाल और 2004 से भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है.
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा तैयारियों को जांचने के लिए ‘तीस्ता प्रहार’ जैसी सैन्य कवायदें जारी हैं. शाह ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य का भी जिक्र किया. उन्होंने इसके लिए विनिर्माण, रक्षा शक्ति, तकनीक और बुनियादी ढांचे समेत सात प्रमुख स्तंभों की बात कही.
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