रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से जारी युद्ध पर शांति प्रयासों की रफ्तार बेहद सुस्त है और यही सुस्ती अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराज़गी की वजह बन गई है. व्हाइट हाउस ने गुरुवार को साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप अब "बिना नतीजे वाली बैठकों" में शामिल होने के मूड में नहीं हैं.
प्रेस से बातचीत में व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति अब सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि ठोस नतीजे चाहते हैं. अमेरिका खुद को इस युद्ध का प्रमुख मध्यस्थ मानकर लगातार कोशिशें कर रहा है, लेकिन प्रगति लगभग ठप है.
"राष्ट्रपति को परिणाम चाहिए, बहस नहीं
लीविट के मुताबिक, ट्रंप दोनों पक्षों रूस और यूक्रेन की धीमी गति से बेहद निराश हैं.वह बोलीं, “राष्ट्रपति अब बातों से थक चुके हैं. वे चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो, सिर्फ मीटिंग्स नहीं.”व्हाइट हाउस के इस बयान ने संकेत दे दिया है कि वाशिंगटन भविष्य की वार्ताओं में केवल तभी शामिल होगा, जब उसे किसी ठोस उपलब्धि की उम्मीद दिखाई दे.
यूरोपीय नेताओं से चर्चा, दूत विटकॉफ सीधे संपर्क में
ट्रंप प्रशासन फिलहाल शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.राष्ट्रपति ने बुधवार को यूरोपीय नेताओं से फोन पर बात की, जबकि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क में हैं.आगामी वीकेंड में होने वाली वार्ता में उच्च-स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधि भेजे जाने पर अभी फैसला नहीं हुआ है. व्हाइट हाउस के अनुसार, निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि बातचीत से वास्तविक प्रगति की कितनी उम्मीद है.
अगर शांति समझौते की संभावना दिखी, तभी भेजेंगे प्रतिनिधि
ट्रंप प्रशासन की स्पष्ट राय है कि अमेरिका तभी आगे बढ़ेगा जब शांति समझौते पर हस्ताक्षर की वास्तविक संभावना नज़र आए. व्हाइट हाउस ने कहा अगर हमें लगे कि इस बार की बैठकें सार्थक होंगी और अमेरिका का समय मूल्यवान होगा, तभी हम प्रतिनिधि भेजेंगे.यानी अब अमेरिका "परिणाम आधारित कूटनीति" के रास्ते पर जाना चाहता है.
डोनेट्स्क से सेना हटाने का सुझाव
इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि अमेरिका उन पर डोनेट्स्क क्षेत्र से सेना पीछे हटाने का दबाव डाल रहा है ताकि वहां एक फ्री इकोनॉमिक ज़ोन बनाया जा सके जिस पर रूस लंबे समय से प्रभाव चाहता है.जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने अमेरिका को 20-बिंदु प्रस्ताव भेजा है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी क्षेत्रीय समझौते पर अंतिम निर्णय जनमत संग्रह के आधार पर ही होगा.
क्रिसमस तक समझौते की कोशिश? दबाव बढ़ा
अल जज़ीरा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाशिंगटन जेलेंस्की पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है कि वे रूस के साथ एक प्रारंभिक शांति समझौता करें.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप क्रिसमस तक किसी न किसी ढांचे पर सहमति चाहते हैं.पूरे प्लान में 20-बिंदु शांति ढांचा, सुरक्षा गारंटी और यूक्रेन के पुनर्निर्माण पर अलग दस्तावेज शामिल हैं. संशोधित ढांचे को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.
डोनबास का नियंत्रण और आखिरी परमाणु संयंत्र
जेलेंस्की ने इशारा किया कि प्रमुख मतभेद दो मुद्दों पर हैं. डोनबास में डोनेट्स्क क्षेत्र का नियंत्रण और ज़ापोरिज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भविष्य, जिस पर फिलहाल रूस का कब्ज़ा है.यही दो बिंदु वर्तमान वार्ता को सबसे ज्यादा उलझा रहे हैं और शांति प्रक्रिया की गति को रोक रहे हैं.
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