चीन के बाद पाकिस्तान पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हमला, परमाणु कार्यक्रमों पर लिया एक्शन; भड़के शहबाज शरीफ

अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए एक दर्जन से अधिक पाकिस्तानी कंपनियों को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया है.

After China Donald Trump big attack on Pakistan took action on nuclear programs Shehbaz Sharif
ट्रंप-शहबाज | Photo: ANI

अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए एक दर्जन से अधिक पाकिस्तानी कंपनियों को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया है. अमेरिका के उद्योग और सुरक्षा ब्यूरो (BIS) ने इन कंपनियों को असुरक्षित परमाणु गतिविधियों में शामिल होने के कारण चेतावनी दी है. इन कंपनियों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा माना गया है. साथ ही, सात और कंपनियां पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में योगदान देने के कारण प्रतिबंधों का सामना कर रही हैं.

70 कंपनियों पर पड़ेगा असर

यह कदम हाल ही में निर्यात प्रशासन नियमों (EAR) में किए गए बदलावों के बाद उठाया गया है. अमेरिका के संघीय रजिस्टर की वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि इन प्रतिबंधों का असर पाकिस्तान के अलावा चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कुल 70 कंपनियों पर पड़ेगा. जिन पाकिस्तानी कंपनियों को इस सूची में डाला गया है, उनमें ब्रिटलाइट इंजीनियरिंग, इंटेनटेक इंटरनेशनल, इंट्रालिंक इंक, प्रोक मास्टर, रहमान इंजीनियरिंग और अन्य शामिल हैं.

अमेरिका का कहना है कि ये कंपनियां उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के खिलाफ काम कर रही हैं. इन कंपनियों के लिए अमेरिकी तकनीक तक पहुंच अब कड़ी हो जाएगी, और उन्हें निर्यात, पुनः निर्यात, और स्थानांतरण के लिए अतिरिक्त लाइसेंस की आवश्यकता होगी.

बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में योगदान देने वाली सात कंपनियों पर प्रतिबंध

इससे अलग, पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में योगदान देने वाली सात कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. इनमें बिजनेस कंसर्न, ग्लोबल ट्रेडर्स, और लिंकर्स ऑटोमेशन जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं. ये कंपनियां मुख्य रूप से पाकिस्तान के विभिन्न शहरों जैसे इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, फैसलाबाद और वाह कैंटोनमेंट में स्थित हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है और इसे अनुचित तथा राजनीति से प्रेरित बताया है. मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता को बाधित करेगी. उन्होंने इसे वैश्विक निर्यात नियंत्रण उद्देश्यों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि इससे पाकिस्तान को नुकसान होगा.

ये भी पढ़ेंः 'इसका महत्व सिर्फ आध्यात्मिक नहीं', ‘नवकार महामंत्र दिवस’ कार्यक्रम में क्या बोले पीएम मोदी?